झारखंड CRPF-CISF घूसखोरी कांड: 60 लाख की अवैध संपत्ति के मिले सबूत; सीनियर्स की भूमिका संदिग्ध
सीबीआई रांची की जांच में केंद्रीय बलों में रिश्वत कांड में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)
HighLights
सीबीआई जांच में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मिली।
आपराधिक साजिश के तहत रिश्वतखोरी के सबूत सामने आए।
रांची में दो बड़े रिश्वत कांडों का खुलासा हुआ।
राज्य ब्यूरो, रांची। केंद्रीय बलों में रिश्वत कांड की जांच में सीनियर्स की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। सीबीआई की रांची स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को जांच में इससे संबंधित सबूत मिले हैं।
सीबीआई रांची की टीम ने जांच में हाल के दिनों में दो बड़े मामलों का खुलासा की है। जांच में यह साबित हो चुका है आपराधिक साजिश के तहत आपसी मिलीभगत से आरोपित रिश्वत लेते थे। इसमें वरीय पदाधिकारियों की मौन सहमति की भी पुष्टि हो चुकी है। इससे जुड़े कई अन्य बिंदुओं पर अभी छानबीन जारी है।
सीबीआई ने 27 अगस्त को रांची के डोरंडा स्थित रीजनल पे एंड अकाउंट्स कार्यालय के तीन लेखा अधिकारियों को 48400 रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तार लेखा अधिकारियों में सीनियर अकाउंट अधिकारी संतोष कुमार महतो, सहायक अकाउंट अधिकारी सुनील कुमार व सहायक अकाउंट अधिकारी सुजीत कुमार सिंह शामिल थे।
उनके आवास पर छापेमारी में 10-12 लाख रुपये नकदी की भी बरामदगी हुई थी। मौके से डिजिटल उपकरण, अचल संपत्ति खरीदने से जुड़े दस्तावेज, निवेश, गहने व बैंकिंग लेन-देन से जुड़े कागजात भी मिले थे।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की संस्था रीजनल पे एंड अकाउंट्स एनआइए, एनसीबी, सीआइएसएफ का अकाउंट्स देखती है। सीआईएसएफ के हवलदार रविकांत त्रिपाठी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर सीबीआई रांची ने उक्त कार्रवाई की थी और यह खुलासा हुआ था।
आरोपितों ने उनकी यात्रा भत्ता व चिल्ड्रेन एजुकेशन अलाउंस बिल के प्रोसेसिंग व भुगतान के एवज में उक्त राशि ली थी।
जूनियर पकड़ाया तो सीनियर की भी खुली पोल
सीबीआई ने सितंबर महीने में सीआरपीएफ की रैफ की इंटर्नल ऑडिट पार्टी के लेखा अधिकारी सोनू कुमार को 14 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था।
सोनू कुमार से पूछताछ में उसके सीनियर वरीय लेखा अधिकारी संतोष कुमार की पोल खुली। भूमिका संदिग्ध मिलने पर संतोष कुमार के ठिकाने पर भी सीबीआई ने तलाशी ली तो वहां से 60 लाख रुपये से ज्यादा की संपत्ति खरीदने के सबूत मिले।
इससे संबंधित दस्तावेज मिले, डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं, जिसका सत्यापन जारी है। सीबीआई को शक है कि उपरोक्त संपत्ति भ्रष्टाचार से अर्जित की गई है।
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