रांची, जागरण संवाददाता। रांची से दिल्ली जानेवाली राजधानी ट्रेनों के यात्रियों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ट्रेन में कैटरर की सेवा उपलब्ध कराने वाले दीपक कंपनी के पास कोई फूड लाइसेंस नहीं हैं। वह आठ महीने से अपनी सेवा ट्रेन के यात्रियों को दे रहा है। इसे न ही रेलवे ने चेक किया और न ही जिला प्रशासन ने सुध ली। ऐसे में ट्रेन के यात्रियों संग किसी भी तरह की समस्या होने पर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

आइआरसीटीसी की इस लापरवाही के कारण कभी भी आम यात्रियों को बड़ी परेशानी से गुजरना पड़ सकता है। कुछ दिनों पहले ही दिल्ली भुवनेश्वर राजधानी ट्रेन में घटिया खाना यात्रियों के बीच परोसे जाने से 56 यात्री फूड प्वाइजनिंग के कारण बीमार पड़ गए थे। इसी संदर्भ में रविवार को डीआरयूसीसी (पैसेंजर एसोसिएशन) सदस्य प्रेम कटारूका, संदीप नागपाल और राजू सरावगी ने चुटिया स्थित बेस किचन का औचक निरीक्षण किया।

उन्होंने देखा कि किचन छोटा है और साफ-सफाई का विशेष ख्याल नहीं रखा जाता है। जहां बर्तनों की धुलाई होती है, वहीं, उसके बगल वाले कमरे में खाना बनाया जाता है। जांच के दौरान सदस्यों द्वारा बेस किचन मैनेजर श्रवण कुमार रजक से फूड लाइसेंस दिखाने के लिए कहा गया तो उसने बताया कि आठ माह पहले अप्लाई किए, लेकिन अभी तक नहीं मिला है।

गुणवत्ता का नहीं रखा जाता ध्यान

यात्रियों को परोसे जानेवाले खाने की गुणवत्ता की कोई जांच नहीं होती है। दूसरी तरफ बिना लाइसेंस के बेस किचन का संचालन किया जा रहा है। हर तरफ से नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। रेलवे द्वारा न कोई आपत्ति और न ही कोई कार्रवाई की जाती है। इसी वजह से हर स्तर से लापरवाही बरती जा रही है।

प्रशासन की ओर से भी लापरवाही बरती जा रही है कि ट्रेन में जाने वाले यात्रियों की जिंदगी ऐसे हाथ में सौंप दी गई है, जिसके पास कोई भी फूड लाइसेंस नहीं है। कुछ दिनों पहले एडीआरएम ने भी रेलवे स्टेशन पर व्यवस्था की जांच की लेकिन बेस किचन की जांच नहीं की गई। उन्होंने जांच सिर्फ फूड स्टॉलों तक सीमित रखी।

आठ माह पहले फूड लाइसेंस के लिए अप्लाय किए थे। लेकिन अब तक नहीं मिला है, संबंधित विभाग का कहना है कि फूड लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया चल रही है। बनते ही लाइसेंस उपलब्ध करा दिया जाएगा। -श्रवण कुमार, बेस किचन मैनेजर, राजधानी ट्रेन

मुझे इसकी जानकारी नहीं है। बिना लाइसेंस के कोई भी यात्रियों को खाना नहीं परोस सकता है। अगर ऐसा है तो मामला गंभीर है। फिलहाल इस मामले में जानकारी लेने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। -देवाशीष चंद्रा, जीजीएम, आइआरसीटीसी

दो माह के बाद अगर लाइसेंस निर्गत नहीं किया जाता है तो, ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्तिअपना काम शुरू कर सकता है। -गरिमा सिंह, एसडीओ, रांची

फूड प्लाजा के किचन में साफ-सफाई नहीं रखा जाता है ख्याल

कमसम फूड प्लाजा के किचन में साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं रहती है। जांच के दौरान डीआरयूसी के सदस्यों ने देखा। उन्होंने देखा जिस टेबल पर कटलेट तैयार किया जा रहा था, उसी टेबल पर किचेन में काम करने वाले कर्मी खाना खा रहे थे। इस व्यवस्था के बीच ग्राहकों को खाना परोसा जाता है। इसके बावजूद कमसम फूड प्लाजा की नियमित जांच नहीं होती है।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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