रांची, राज्य ब्यूरो। त्योहारों की खुमारी उतरते ही भाजपा के चुनावी तेवर वापस लौट आए हैं। भाजपा के जन आशीर्वाद यात्रा की कमान संभाल रहे मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अपनी अधूरी कोल्हान यात्रा को दोबारा शुरू किया। वहीं, संगठन के स्तर पर मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक की गतिविधियां में खासी तेजी दिखी। भाजपा विकास के एजेंडे पर चुनाव लडऩे के आपने इरादों को स्पष्ट करते हुए केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच ले जाने के साथ-साथ विपक्षी दलों पर हमलावर है।

मुख्यमंत्री रघुवर दास 11 से 13 अक्टूबर की अपनी कोल्हान यात्रा के दौरान पूरी तरह से मुख्य विपक्षी दल झामुमो पर हमलावर दिखे। उनके निशाने पर झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन और नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन रहे। उन्होंने अपनी जनसभाओं में स्पष्ट कहा कि यदि कोल्हान का विकास चाहते हैं तो इस क्षेत्र को झामुमो से मुक्त करें। इसकी वजह भी स्पष्ट थी। कोल्हान के जिन क्षेत्रों का रुख मुख्यमंत्री ने किया, वे भाजपा के लिए अपेक्षाकृत कड़े मुकाबले वाले क्षेत्र माने जाते हैं। कोल्हान प्रमंडल का भाजपा का टास्क तनिक चुनौतीपूर्ण है।

पिछले विधानसभा चुनावों में झामुमो सत्ताधारी दल भाजपा पर भारी पड़ा था। कोल्हान की 14 में से सात सीटों पर झामुमो ने जीत दर्ज की थी जबकि भाजपा ने पांच में। जुगसलाई भाजपा की सहयोगी आजसू पार्टी की झोली में गई थी तो जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र से जय भारत समानता पार्टी की गीता कोड़ा विजयी हुईं थी। यह सीट फिलहाल रिक्त है। गीता कोड़ा अब कांग्रेस सांसद हैं। उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा को लोकसभा चुनावों में सिंहभूम संसदीय सीट से चुनाव हराया था। कोल्हान प्रमंडल मुख्यमंत्री रघुवर दास की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा  से भी जुड़ा है, वे खुद भी इसी प्रमंडल से आते हैं।

लक्ष्मण गिलुवा ने आजसू को उसकी हैसियत का कराया एहसास आजसू ने भी दिया जवाब 

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने अपने सहयोगी दल आजसू को उसकी हैसियत का एहसास कराते हुए स्पष्ट कर दिया कि आजसू को सिर्फ उतनी ही सीटें दी जाएंगी जितनी वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में दी गईं थी। गिलुवा यह कहने से भी नहीं चूके कि आजसू फुटबाल भीड़ में उमड़ी भीड़ को अपना समर्थक समझने की भूल न करें। सीट शेयरिंग के इसी फार्मूले पर यदि अमल हुआ तो आजसू के खाते में महज आठ सीटें ही आएंगी।

इधर, आजसू ने भी गिलुवा के बयान के तत्काल बाद पलटवार किया। आजसू के केंद्रीय प्रवक्ता देवशरण भगत ने साफ किया कि यदि एनडीए को 65 प्लस का लक्ष्य पाना है तो यह बिना साझा प्रयास के हल नहीं होगा। अब यह तय माना जा रहा है कि सत्ता पक्ष के सहयोगी दलों की इस टकराहट का हल दिल्ली में ही निकलेगा।

विधानसभा का घोषणापत्र बनाने में जुटी भाजपा

विधानसभा चुनाव के पूर्व की तैयारियों की बात करें तो भाजपा अपने सहयोगियों से कहीं आगे हैं। जमीनी स्तर पर सक्रियता के साथ-साथ भाजपा ने अब अपने चुनाव घोषणापत्र पर काम शुरू कर दिया है। भाजपा की चुनाव घोषणापत्र समिति की बैठक में यह तय हुआ है कि पार्टी राज्य के हर वर्ग की रायशुमारी से अपना घोषणापत्र तैयार करेगी। घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष सांसद बीडी राम की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी प्रमंडलों में बैठक कर रायशुमारी की जाएगी।

इस क्रम में 17 अक्टूबर को रांची, 19 को पलामू, 23 को दुमका, 24 को धनबाद एवं 25 को हजारीबाग प्रमंडल में बैठक की जाएगी। कोल्हान प्रमंडल की तिथि बाद में घोषित की जाएगी। इसके अलावा घोषणपत्र के मद्देनजर जनता के सुझावों को एकत्र करने के लिए प्रत्येक मंडल में एक पेटी भेजी जाएगी। इस पेटी में आए सुझावों को भाजपा अपने चुनाव घोषणपत्र में समाहित करेगी। कार्यक्रम पूरे राज्य में 21, 22 और 23 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा।

Posted By: Alok Shahi

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