विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

झारखंड में पशुओं की बीमारियों की रोकथाम के लिए तकनीकी मदद करेगा ऑस्ट्रेलिया, कांके में बनेगी केंद्रीय लैब

Published: Fri, 23 Oct 2026 07:58 PM (GMT+05:30)

ऑस्ट्रेलिया झारखंड में पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने और बीमारियों की रोकथाम में तकनीकी सहायता देगा।

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)

HighLights

  1. ऑस्ट्रेलिया झारखंड को पशु उत्पादकता, रोग रोकथाम में करेगा मदद।

  2. पशुपालन विभाग के अधिकारी आधुनिक तकनीक सीखने ऑस्ट्रेलिया जाएंगे।

  3. राज्य में केंद्रीय और जिला स्तर पर नई लैब बनेंगी।

मनोज सिंह, रांची। राज्य के पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने और बीमारियों की रोकथाम में आस्ट्रेलिया मदद करेगा। आस्ट्रेलिया की मेलबर्न यूनिवर्सिटी पशुपालन विभाग को तकनीकी सहयोग देने के लिए तैयार है।

इसके लिए पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. राजीव रंजन और गव्य विभाग के उप निदेशक मनोज कुमार तिवारी आस्ट्रेलिया के दौरे पर जा रहे हैं।

नौ नवंबर से 14 नवंबर तक प्रस्तावित यात्रा में राज्य के पशुओं की बीमारियों की रोकथाम के लिए आधुनिक चिकित्सा और पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने की तकनीकी के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

इस दौरान विभाग की टीम राज्य के पशुओं में होने वाली बीमारियों की स्थिति, तकनीकी दक्षता और पशु चिकित्सालय की वर्तमान स्थिति का ब्योरा भी साझा करेंगी, ताकि भविष्य में बीमारियों की रोकथाम में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के बारे में योजना बनाई जा सके।

फिलहाल विभाग की ओर से प्रखंड, जिला और मुख्यालय स्तर पर आधुनिक प्रयोगशाला बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

इसके अलावा रांची के कांके में एक केंद्रीय लैब बनाने की योजना तैयार की जा रही है। जहां पर सभी जगहों से आने वाले सैंपल की जांच की जाएगी और बीमारियों को पहचानने में मदद मिलेगी।

बीमारियों की वजह से किसानों को होती परेशानी

राज्य में पशुओं की संख्या 1.17 करोड़ है। जिसमें सबसे ज्यादा एफएमडी (खुरपका-मुंहपका रोग), पीपीआर (भेड़-बकरी की महामारी) ब्रुसेलोसिस और लम्पी बीमारी होती है।

ब्रुसेलोसिस बीमारी गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सूअर अन्य पशुओं को प्रभावित करती है। इससे इंसानों को भी संक्रमित होने का खतरा रहता है।

इन बीमारियों की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार की ओर से शत-प्रतिशत टीकाकरण की राशि दी जाती है। इन बीमारियों के कारण पशुओं के मरने पर गरीब किसानों को काफी क्षति होती है।

इसके अलावा संक्रमण की आशंका को देखते हुए राज्य में उत्पादित मांस और अंडों को बाहर भेजने में भी समस्या का सामना करना पड़ता है। विभाग की ओर से इन सभी पहलुओं को देखते हुए आस्ट्रेलिया से तकनीक सहयोग की मांग की गई है।

आस्ट्रेलिया की टीम करेगी राज्य का दौरा

विभाग की टीम के आस्ट्रेलिया में प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकी का निरीक्षण करने के बाद आस्ट्रेलिया की टीम राज्य का दौरा करेगी।

आस्ट्रेलियन टीम यहां पर स्थलीय जांच कर लैब बनाने, बीमारियों के रोकथाम के उपाय और उत्पादन को बढ़ाने पर एक रिपोर्ट विभाग को समर्पित करेगी, जिसके आधार पर विभाग की ओर से अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी।

विभाग की ओर से कांके में केंद्रीय लैब बनाने की संरचना को प्रारूप तैयार करने के लिए भवन निर्माण विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वहीं, प्रखंड स्तर पर छह कमरे, जिलास्तर पर करीब दस कमरे की लैब बनेगी। जहां पर पशुओं की सैंपल संग्रह करने के लिए आधुनिक मशीनें भी लगाई जाएंगी।

यह भी पढ़ें- रांची-जमशेदपुर समेत 7 जिलों में पारदर्शी होगी बिजली खरीद, जेबीवीएनएल लगा रहा 79 हाई-टेक एबीटी मीटर