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रांची-जमशेदपुर समेत 7 जिलों में पारदर्शी होगी बिजली खरीद, जेबीवीएनएल लगा रहा 79 हाई-टेक एबीटी मीटर

Published: Fri, 23 Oct 2026 01:20 PM (IST)

झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) राज्य में बिजली खरीद और आपूर्ति का हिसाब सटीक बनाने के लिए 79 एबीटी ...और पढ़ें

झारखंड में बिजली खरीद का हिसाब होगा, पारदर्शी एबीटी मीटर से लाइन लॉस की जांच भी आसान।

झारखंड में बिजली खरीद का हिसाब होगा, पारदर्शी एबीटी मीटर से लाइन लॉस की जांच भी आसान।

HighLights

  1. जेबीवीएनएल 79 एबीटी मीटर लगाएगा बिजली लेखांकन हेतु।

  2. मेदिनीनगर सहित सात एरिया बोर्ड होंगे लाभान्वित इस योजना से।

  3. पांच साल तक चयनित एजेंसी करेगी मीटरों का रखरखाव।

जागरण संवाददाता, मेदिनीनगर (पलामू)। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) राज्य में बिजली की खरीद और आपूर्ति के हिसाब को अधिक सटीक बनाने के लिए आधुनिक मीटरिंग व्यवस्था लागू करने जा रहा है।

इसके तहत मेदिनीनगर समेत राज्य के सात विद्युत एरिया बोर्ड्स में 33 केवी के बिजली इंटरफेस प्वाइंट्स पर 79 एबीटी (एवरेज बाय टाइम) मीटर लगाए जाएंगे। निगम ने इसके लिए टेंडर जारी कर दिया है।

इस योजना में मीटरों की खरीद, स्थापना और कमीशनिंग के साथ-साथ पांच वर्षों तक उनका रखरखाव (मेंटेनेंस) भी शामिल है। एबीटी मीटर निर्धारित समयांतराल पर बिजली के प्रवाह और ऊर्जा की मात्रा का रिकॉर्ड रखेंगे।

इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस समय कितनी बिजली मिली। इससे बिजली की खरीद और आपूर्ति के आंकड़ों का मिलान करने तथा ऊर्जा लेखांकन (एनर्जी अकाउंटिंग) में पारदर्शिता बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी।

राज्य के सातों एरिया बोर्ड्स में होगी स्थापना

इस योजना के तहत मेदिनीनगर, रांची, जमशेदपुर, दुमका, गिरिडीह, धनबाद और हजारीबाग विद्युत एरिया बोर्ड्स में ये मीटर लगाए जाएंगे। टेंडर में मीटरों के साथ-साथ मीटरिंग यूनिट, जरूरी उपकरण और एबीटी सॉफ्टवेयर की आपूर्ति भी शामिल है। चयनित एजेंसी स्थापना और कमीशनिंग के बाद आगामी पांच वर्षों तक इनका रखरखाव करेगी।

लाइन लॉस की जांच में मिलेगी मदद

आधुनिक मीटरों के जरिए अलग-अलग इंटरफेस प्वाइंट्स पर दर्ज आंकड़ों की आसानी से तुलना की जा सकेगी। इससे बिजली की आवक और आपूर्ति के हिसाब में आने वाले अंतर का पता लगाने तथा संभावित तकनीकी नुकसान (लाइन लॉस) की जांच करने में मदद मिलेगी।

एबीटी सॉफ्टवेयर के माध्यम से आंकड़ों का विश्लेषण कर असामान्य अंतर वाले बिंदुओं की पहचान भी की जा सकेगी। यह व्यवस्था झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड (जेयूएसएनएल), जेबीवीएनएल और दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के बीच बिजली के आदान-प्रदान का सही लेखा-जोखा रखने में बेहद उपयोगी साबित होगी।