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कौन हैं झारखंड की वो 4 बेटियां? भारतीय महिला हॉकी टीम को एशियन गेम्स में दिलाया गोल्ड

Published: Sat, 03 Oct 2026 07:08 PM (IST)Updated: Sat, 03 Oct 2026 07:15 PM (IST)

भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियाई खेलों में चीन को 1-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता, जिससे उन्हें 2028 लॉस ...और पढ़ें

झारखंड की 4 बेटियों का जलवा। (जागरण)

झारखंड की 4 बेटियों का जलवा। (जागरण)

HighLights

  1. भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता।

  2. इस जीत से 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक का सीधा टिकट पक्का हुआ।

  3. झारखंड की चार खिलाड़ियों ने टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।

डिजिटल डेस्क, रांची। जब इरादे लोहे के हों और हौसले बुलंद, तो नंगे पैर उबड़-खाबड़ मैदानों पर दौड़ना भी इतिहास रचने की पहली सीढ़ी बन जाता है।

एशियाई खेलों () के मंच पर भारतीय महिला हॉकी टीम ने शुक्रवार को गत चैंपियन चीन को 1-0 के अंतर से मात देकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

44 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद मिला यह ऐतिहासिक स्वर्ण न केवल भारत को एशियाई हॉकी के शीर्ष पर ले आया, बल्कि इसने सीधे 'लास एंजिलिस ओलिंपिक 2028' का आधिकारिक टिकट भी पक्का कर दिया।

भारत की इस ऐतिहासिक जीत में निर्णायक भूमिका निभाई 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहीं लालरेमसियामी के एकमात्र विजयी गोल ने।

इस सुनहरे अध्याय की सबसे खास बात यह रही कि इस राष्ट्रीय विजय रथ की कमान झारखंड के लाल-माटी की बेटियों के हाथों में थी।

सिमडेगा की सलीमा टेटे के कुशल नेतृत्व में उतरी भारतीय टीम में झारखंड की चार बेटियों—सलीमा टेटे, ब्यूटी डुंगडुंग, दीपिका सोरेंग और निक्की प्रधान ने अपनी प्रतिभा का वो प्रदर्शन किया कि पूरा देश गर्व से झूम उठा।

सलीमा टेटे (Salima Tete )

सिमडेगा जिले के बेहद छोटे और ग्रामीण अंचल 'बड़की छापर' से निकलकर अंतरराष्ट्रीय हॉकी में धाक जमाने वाली सलीमा टेटे आज संघर्ष और सफलता की सबसे बड़ी प्रतिमूर्ति हैं।

27 दिसंबर 2001 को जन्मी सलीमा के पिता सुलक्षण टेटे एक साधारण किसान हैं और मां सुभानी टेटे दूसरों के घरों में खाना बनाकर परिवार का भरण-पोषण करती थीं।

आर्थिक अभाव ऐसा था कि सलीमा ने शुरुआत में अपने गांव के पथरीले मैदानों में नंगे पैर बांस की बनी स्टिक से हॉकी सीखी।

16 साल की उम्र (2016) में सीनियर टीम का बुलावा पाने वाली सलीमा ने 2018 यूथ ओलिंपिक में भारतीय जूनियर टीम को अपनी कप्तानी में रजत पदक दिलाया और टोक्यो ओलिंपिक 2020 में अपनी अविश्वसनीय गति से दुनिया को अचंभित किया।

आज अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित सलीमा भारतीय सीनियर टीम की कप्तान के रूप में देश को वैश्विक मंचों पर गौरवान्वित कर रही हैं।

प्रमुख उपलब्धियां

  • टोक्यो ओलिंपिक 2020 (चौथा स्थान)
  • राष्ट्रमंडल खेल 2022 व एशियाई खेल 2022 (कांस्य पदक)
  • एशियन चैंपियंस ट्रॉफी (2023, 2024 - स्वर्ण पदक)
  • FIH नेशन्स कप (2022, 2026 - स्वर्ण पदक)

ब्यूटी डुंगडुंग (Beauty Dungdung)

21 जुलाई 2003 को सिमडेगा में जन्मीं 22 वर्षीय ब्यूटी डुंगडुंग की कहानी हिम्मत और री-एंट्री की अनूठी मिसाल है। महज पांच साल की उम्र में जब पिता ने उन्हें बांस की पहली छड़ी बनाकर दी थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह बच्ची आगे चलकर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) में स्पोर्ट्स ऑफिसर बनेगी।

वर्ष 2023 में घुटने की गंभीर चोट के कारण ब्यूटी को दो साल तक मैदान से पूरी तरह दूर रहना पड़ा। इसी कठिन रिहैबिलिटेशन दौर के दौरान उनके सिर से पिता का साया भी उठ गया।

इस मानसिक व व्यक्तिगत सदमे के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और राष्ट्रीय कैंप में ऐसा प्रदर्शन किया कि सीधे भारतीय फॉरवर्ड लाइन की रीढ़ बन गईं।

प्रमुख उपलब्धियां

  • बिहार एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2024 (स्वर्ण पदक)
  • FIH नेशन्स कप 2026 (स्वर्ण पदक)
  • एशिया कप 2025 व वर्ल्ड कप क्वालिफायर 2026 (रजत पदक)
Asian Games 2026

निक्की प्रधान (Nikki Pradhan)

8 दिसंबर 1993 को खूंटी जिले में जन्मीं निक्की प्रधान वह खिलाड़ी हैं जिन्होंने झारखंड की महिला खिलाड़ियों के लिए ओलिंपिक के दरवाजे खोले।

रियो ओलिंपिक 2016 में उतरकर वह ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली राज्य की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी बनीं।

शुरुआती दिनों में छड़ियों के अभाव से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 200 मैच पूरे करने (मार्च 2026) तक का निक्की का सफर यह बताता है कि दृढ़ संकल्प के आगे साधन कभी बाधा नहीं बनते। टोक्यो ओलिंपिक में भारतीय टीम के ऐतिहासिक चौथे स्थान में उनका अनुभव निर्णायक साबित हुआ था।

प्रमुख उपलब्धियां

  • रियो 2016 व टोक्यो 2020 ओलिंपिक प्रतिभागी (टोक्यो में चौथा स्थान)
  • एशियाई खेल (2018 - रजत, 2022 - कांस्य)
  • एशिया कप 2017 व एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2023 (स्वर्ण पदक)
  • नेशन्स कप (2022, 2026 - स्वर्ण पदक)

दीपिका सोरेंग (Deepika Soreng)

17 दिसंबर 2003 को सिमडेगा में जन्मीं मिडफील्डर दीपिका सोरेंग का जीवन भी कड़े संघर्षों की उपज है। पिता के असामयिक निधन के बाद मां ने मजदूरी करके दीपिका के सपनों को टूटने नहीं दिया।

भारतीय रेलवे में कार्यरत और साई बैंगलोर में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली दीपिका ने 2023 जूनियर एशिया कप के 6 मुकाबलों में 7 गोल दागकर भारत को चैंपियन बनाया था।

इसके बाद हॉकी विश्व कप (ओमान) में रजत पदक दिलाने के बाद 2024 प्रो लीग से सीनियर टीम में पदार्पण किया और आज टीम की सबसे भरोसेमंद युवा मिडफील्डर बन चुकी हैं।

प्रमुख उपलब्धियां

  • जूनियर एशिया कप 2023 (स्वर्ण पदक - 7 गोल)
  • हॉकी5s विश्व कप ओमान (रजत पदक)
  • एशिया कप 2025 (रजत पदक)
  • FIH नेशन्स कप न्यूजीलैंड 2026 (स्वर्ण पदक)


झारखंड के ग्रामीण आंचल से निकलकर ओलिंपिक के विशाल मंच तक का यह सफर केवल इन चार खिलाड़ियों की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह देश की लाखों उन बेटियों के लिए एक प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं।

(SAI और एजेंसी के इनपुट के आधार पर)

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