रांची : भाद्रपद मास के चतुर्थी तिथि गुरुवार को भगवान विष्णु के अनंत रूप की विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना हुई। मंदिरों में सुबह से ही अनंत पूजा के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही। श्रद्धालु अपने-अपने घरों से लाये अनंत की पूजा कराई। प्रसाद चढ़ाए गए। पुरोहितों द्वारा अनंत भगवान की कथा सुनाई गई। पूजा के समाप्ति के बाद महिलाएं बाएं हाथ में तथा पुरुष दाएं हाथ में रक्षा सूत्र धारण किया। मान्यता है कि 14 गांठ भगवान विष्णु द्वारा निर्मित 14 लोक का द्योतक है। प्रभु के कृपा से अनंत सूत्र का एक-एक गांठ जीवन के अनेकों परेशानियों को दूर करता है। पूरे दिन चतुर्दशी तिथि होने के कारण शाम तक लोग पूजा कराने मंदिर आते रहे। सबसे ज्यादा भीड़ पहाड़ी मंदिर, पिस्का मोड़ विश्वनाथ मंदिर, सर्जना चौक श्रीराम मंदिर, हिनू राम मंदिर, चुटिया प्राचीन श्रीराम मंदिर में देखने को मिली। यहां सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। पितृपक्ष शुरू, 14 से तर्पण आरंभ, तिथि के अनुसार करें अपने पितरों का पिंडदान

रांची : ज्योतिष विभाग के लेक्चरर एसके घोषाल के अनुसार आश्रि्वन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से पितृपक्ष आरंभ होगा। इस बार 14 सितंबर से 28 सितंबर तक पितृपक्ष रहेगा। प्रतिपदा 14 सितंबर को सुबह 8.41 बजे आरंभ होगा। उदया तिथि के कारण कई लोग 15 सितंबर से भी तर्पण आरंभ करेंगे।

पितृपक्ष के दौरन पितरों को तर्पण(अ‌र्घ्य) देने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। पितृपक्ष के दौरान पितर अपने पुत्र पौत्रों से तिलांजलि प्राप्त करने धरती पर आते हैं। पितर अपने पुत्रों से पिंडदान की उम्मीद करते हैं। इससे उन्हें शांति मिलती है। पितृपक्ष के दौरान जो तर्पण, श्राद्ध आदि नहीं करते हैं पितर कुपित होकर श्राप तक दे देते हैं।

गया में फल्गु नदी के किनारे करें पितरों का पिंडदान

वहीं बड़ी संख्या में लोग पिंडदान के लिए बिहार के गया, बद्रीनाथ के समीप ब्रह्माकपाल सहित कई अन्य स्थानों पर पितरों को पिंडदान दिया जाता है। विशेषकर गया में पिंडदान के लिए 16 दिनों का पितृपक्ष मेला लगता है। देश-विदेश से लाखों लोग गया में अपने पितरों को पिंडदान करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि गया में फल्गु नदी तट पर विष्णुपद मंदिर के पास एवं अक्षयवट के पास पिंडदान करने से पूर्वजों को जन्म मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है।

इस दिन करें अपने पितरों का पिंडदान

शास्त्रों के अनुसार जिस तिथि को पितरों की मृत्यु हुई है। उसी तिथि को श्राद्ध व पिंडदान किया जाता है। मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो तो अमावस्या तिथि 28 सितंबर को अपने पितरों का श्राद्ध कर सकते हैं। वहीं जिन लोगों की अकाल मृत्यु हुई हो उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि 27 सितंबर को करें। पितृपक्ष के 15 दिन तक शुभकार्य, विवाह, मुंडन, नई खरीदारी वर्जित माना गया है।

Posted By: Jagran

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