जागरण संवाददाता, रांची : वरिष्ठ फिल्मकार महेश भट्ट ने कहा कि शराब परिवार को दीमक की तरह खा जाती है। इससे छुटकारा जरूरी है। ये आपसी रिश्ते तोड़ देती है। हमें अपने ऐब से आख मिलाने की कोशिश करनी चाहिए। हमें शराब छोड़े हुए 29 साल हो गए। रविवार को महेश भट्ट बेटी पूजा भट्ट के साथ स्टेट गेस्ट हाउस में मीडिया से मुखातिब थे। फिल्म डैडी के नाट्य रूपातरण के मंचन के सिलसिले में राची आए हुए हैं।

अपने बारे में कहा कि अब कोई लाख कहे, एक बूंद तक नहीं लेता। समाज अंधेरे से जबतक आख नहीं मिलाएगा रोशनी संभव नहीं। इसके लिए आपको खुद ही पहल करनी होगी। सरकार के शराब बैन करने से कुछ नहीं होगा। अब सामाजिक ताना-बाना वो नहीं रहा। पहले शराब पीकर लोग घर जाने से डरते थे, मा क्या कहेगी। पत्‍‌नी या बहन क्या बोलेगी। पान खा लिया करते थे।

उन्होंने नाटक टीम से भी परिचय कराया। बताया कि 29 साल पहले उन्होंने सबसे पहले दूरदर्शन के लिए फिल्म डैडी बनाई थी। पहले तो लोगों ने तंज कसे। लेकिन जब फिल्म चल निकली तो प्रशसा करने लगे। फिल्म में एक बाप और बेटी की कहानी है। जिसमें बेटी के जज्बे को दिखाया गया है, जिसके बल पर वो अपने शराबी पिता से शराब पीना छुड़वा देती है। डैडी का सिक्वल बनाने की भी उनकी योजना है। शराबी होना दरअसल एक तरह की बीमारी है। इसका इलाज भी है।

18 माह से नहीं पी शराब : पूजा भट्ट

सड़क, तमन्ना, दिल है कि मानता नहीं और डैडी जैसी फिल्मों से मशहूर हुईं पूजा भट्ट ने कहा कि फिल्मी दुनिया की कहानी को लोग दिलचस्प समझते हैं। जबकि हम भी आम ही लोगों की तरह जिंदगी जीते हैं। शराब सिर्फ पुरुष की जागीर नहीं। महिलाएं भी शराब पीती हैं। लेकिन ऐसा हरगिज नहीं कि इससे मुक्ति न मिले। कोई भी ये लत छोड़ सकता है।

पापा महेश भट्ट ने डैडी बनाते समय 29 साल पहले छोड़ दी, तो हमने 18 माह पहले। जब पापा का एक मैसेज आया, बेटा अपना ध्यान रखो। खुश रहो। इसके बाद से हमने पीनी छोड़ दी। पूजा ने जागरण फिल्म फेस्टीवल की चर्चा की। कहा, उसने राची आने का मौका दिया था और आज मैं डैडी के नाट्य रूपातरण के लिए दूसरी बार इस शहर में आई हूं।

पूजा ने कहा, अगर अभी आप किसी से नशे की लत के बारे में बात करेंगे, तो वह कहेगा कि मैं तो सिर्फ संडे को पीता हूं लेकिन नशा का आदी सिर्फ उसे नहीं कहते जो पीकर गटर में गिरा होता है। आपको कब नशा अपने गिरफ्त में ले ले, यह आपको पता भी नहीं चलेगा।

आड्रे हाउस भी गए महेश व पूजा भट्ट :

महेश भट्ट व पूजा भट्ट आड्रे हाउस भी गए और यहां लगी प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। आड्रे हाउस को सराहा भी। उन्होंने रश्मि प्रसाद के चित्रों की लगी प्रदर्शनी भी देखी। रश्मि के जीसस और पिता पर बनी पेंटिंग को पसंद किया। पूजा ने कहा, मैं भी जीसस लवर हूं। पर्यटन विभाग के सचिव मनीष रंजन, कला निदेशालय के अशोक कुमार सिंह आदि ने उनका स्वागत किया।

डैडी का मंचन :

रविवार की शाम रिम्स सभागार में फिल्म 'डैडी' का मंचन किया गया। बाप-बेटी के बीच एक भावनात्मक रिश्ते की दास्तान की अद्भुत प्रस्तुति है। महेश भट्ट निर्देशित फिल्म डैडी में पिता का किरदार अनुपम खेर जबकि पुत्री की भूमिका महेश भट्ट की बड़ी बेटी पूजा भट्ट ने निभाई थी। अनुपम खेर को 'डैडी' के लिए साल 1990 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। नाट्य मंचन का निर्देशन दिनेश गौतम ने किया था। नाटक में पिता की भूमिका रंगकर्मी इमरान जाहिद ने और पुत्री की नवोदित रंगमंच कलाकार चेतना धयानी ने किया था।

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