रांची ,जासं । रांची जिला बार एसोसिएशन से 19.38 लाख रुपये गबन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है l अधिवक्ता लगातार गबन मामले की सीबीआइ जांच कराने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं l शनिवार को दर्जन भर से ज्यादा अधिवक्ताओं ने कोतवाली थाना में आवेदन देकर ऑडिट रिपोर्ट से संबंधित दस्तावेज सीज करने की मांग की है l अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि गबन का खुलासा न हो, इसके लिए कमेटी दस्तावेज से छेड़छाड़ कर सकती है l दर्ज शिकायत के अनुसार अधिवक्ताओं ने निवर्तमान महासचिव कुंदन प्रकाशन पर भी निशाना साधा है l अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि पुरानी कमेटी ने गबन का मामला सामने आने के बाद भी एफ आइ आर दर्ज कराने में देरी की l

अधिवक्ताओं ने कहा कि जांच से पहले ही ऑडिट रिपोर्ट निवर्तमान कमेटी के सामने आ चुकी थी, इसके बावजूद एक साजिश के तहत एफ आइ आर दर्ज कराने में देरी की गई l पुलिस इसकी जांच करे l साथ ही, नए बार भवन में अधिवक्ताओं को आवंटित कमरे को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं l बार भवन के तीसरे और चौथे तल्ले पर आवंटित कमरे की जांच करने की मांग की गई है l कहा गया है कि कई ऐसे अधिवक्ताओं को कमरा आवंटित किया गया जो योग्य नहीं थे l

बता दें कि रांची जिला बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव कुंदन प्रकाशन ने ऑफिस की लेखा लिपिक ज्योति कुमारी के खिलाफ 19.38 लाख रुपये गबन की प्राथमिकी कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि ज्योति कुमारी ने आपराधिक षड्यंत्र करते हुए बिना कोई सूचना के बार एसोसिएशन के पैसे का दुरुपयोग किया। उस पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

ऑडिट रिपोर्ट से हुआ गबन का खुलासा

पुलिस को दिए लिखित शिकायत में कुंदन प्रकाशन ने कहा कि एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 तक वार्षिक ऑडिट का कार्य झारखंड राज्य के विधिक परिषद द्वारा भेजे गये ऑडिटर अंकित माहेश्वरी की देखरेख में किया गया। 25 सितंबर को ऑडिटर ने रिपोर्ट बार एसोसिएशन को भेजा। ऑडिट रिपोर्ट देखने के बाद गबन की जानकारी मिली। कुंदन प्रकाशन के अनुसार एसोसिएशन को शपथ पत्र, बेल बांड, हाजिरी पेपर, वकालतनामा व अन्य श्रोतों से प्राप्त आय में से 11 लाख 29 हजार 440 रुपये रांची बार एसोसिएशन के खाते में जमा नहीं किए गए।

शपथ पत्र रांची जिला बार एसोसिएशन के पुराने बार भवन से बेचने का कार्य पहले बार के कर्मचारी शैलेंद्र कुमार करते थे। फिलहाल इसकी जिम्मेदारी लिपिक राजा कुमार पर है। वहीं, बेल बाउंड, वकालतनामा, हाजिरी पेपर, वेलफेयर टिकट आदि बेचने की जिम्मेदारी लिपिक संदीप मिंज, उपेंद्र महतो, मैनुल अंसारी पर है। ये लोग प्रतिदिन प्राप्त आय का ब्यौरा लेखा लिपिक ज्योति कुमारी देती को देते थे।

पिता की बीमारी का बहना बनाकर ऑडिट के समय गायब थी आरोपित

दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि ऑडिट के समय ऑडिटर द्वारा बार-बार लेखा लिपिक ज्योति कुमार को आवश्यक कागजात के साथ उपस्थित होने को कहा जाता रहा। हर बार ज्योति कुमारी अपने पिता की बीमारी का बहाना बनाकर गायब हो जाती थीं। बता दें कि ज्योति की बार एसोसिएशन में नियुक्ति 11 फरवरी 2020 को हुई थी। दो नवंबर 2020 से 16 जुलाई 2021 तक एवं 29 जुलाई 2021 से सात अगस्त 2021 तक लेखा लिपिक के रूप में कार्य किया।

Edited By: Kanchan Singh