रांची : हजारीबाग के बरकट्ठा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण में भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई है। इंजीनियरों ने फर्जी बिल पर सरकार के 64 लाख 11 हजार नौ रुपये हड़प लिए। लोकायुक्त के आदेश पर जब पूरे मामले की जांच कराई गई, तो इस फर्जीवाड़ा की पुष्टि हुई है। अब दोषी इंजीनियरों पर कानून सम्मत कार्रवाई के साथ-साथ उनसे राशि वसूली के लिए भी नीलाम पत्र वाद दायर करने की कार्रवाई होने वाली है।

गबन के इस पूरे मामले की जांच हजारीबाग के ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता इंजीनियर देवेंद्र प्रसाद ने की है। जांच रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग झारखंड ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरकट्ठा के निर्माण के लिए 31 मई 2008 को तीन करोड़ 53 लाख 59 हजार 200 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी थी। इस योजना के तहत निर्माण कार्य के कार्यान्वयन के लिए ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल हजारीबाग को कार्यकारी एजेंसी बनाया गया था। यह कार्य वर्ष 2008-09 में विभागीय रूप से कराया जा रहा था।

जांच रिपोर्ट के अनुसार गबन के 64 लाख 11 हजार नौ रुपयों में तत्कालीन कनीय अभियंता राम स्नेही चौबे, हरिशंकर सिंह, राजेंद्र प्रसाद राय, तत्कालीन सहायक अभियंता देवदर्शन सिंह ने कुल 46 लाख 28 हजार 361 रुपये का गबन किया। इसी तरह, तत्कालीन कनीय अभियंता निर्मल कुमार तिवारी, तत्कालीन सहायक अभियंता सुनील कुमार व तत्कालीन कार्यपालक अभियंता जवाहर साह ने मिलकर 17 लाख 82 हजार 648 रुपये का गबन कर लिया। रिपोर्ट के अनुसार वास्तविक कार्य मूल्य से अधिक राशि के गबन के लिए अभियंताओं के साथ-साथ तत्कालीन रोकड़पाल प्रशांत शेखर सिन्हा भी दोषी हैं।

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