पढ़ने की कोई उम्र नहीं! 64 साल की उम्र में सुशांत कुमार घोष ने फिजिक्स में पूरी की PhD, DSPMU में मिलेगी डिग्री
64 वर्षीय सुशांत कुमार घोष ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के फिजिक्स विभाग से पीएचडी पूरी की है। जेवीएम ...और पढ़ें

सुशांत कुमार घोष की फाइल फोटो। जागरण
HighLights
64 वर्षीय सुशांत कुमार घोष ने फिजिक्स में पीएचडी की।
डीएसपीएमयू से क्वांटम नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी में शोध।
दिवाकर सिंह, रांची। कहते हैं पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती है इसके लिए पैशन और जज्बे की जरूरत होती है। कुछ यही साबित किया है डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के फिजिक्स में पीएचडी करने वाले 64 वर्षीय सुशांत कुमार घोष ने।
इनके जज्बे ने ये बता दिया कि अगर आपके अंदर पढ़ने की इच्छा है तो आप किसी भी उम्र में उसे शुरू कर सकते हैं। इन्हें डीएसपीएमयू के तीसरे दीक्षा समारोह में 24 सितंबर को डिग्री प्रदान की जाएगी। इन्होंने क्वांटन नैनो साइंस एंड टेक्नोलाजी विषय में अपना शोध विवि के फिजिक्स विभाग के शिक्षक डा. जेपी शर्मा के निर्देशन में पूरा किया है।
स्कूल से सेवानिवृत होने के बाद पूरा किया पीएचडी
सुशांत कुमार बताते हैं कि पीएचडी करना आसान नहीं था। इसके लिए मैंने सबसे पहले रांची विश्वविद्यालय में भी आवेदन दिया, लेकिन वहां नामांकन नहीं हुआ।
इसके बाद 2019 में डीएसपीएमयू में पीएचडी प्रवेश परीक्षा का आयोजन हुआ और इनको सफलता मिली जिसके बाद 2020 में इनका फिजिक्स विभाग के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन हुआ। लेकिन जेवीएम श्यामली स्कूल के उप प्राचार्य के रूप में काम करने के दौरान इनको अपने शोध कार्य के लिए समय नहीं मिल पाता था।
इसके बाद 2023 में ये स्कूल से सेवानिवृत हो गए। जिसके बाद इन्होंने पूरी लगन के साथ अपने शोध कार्य पर काम करना शुरू किया। इसमें डा. जेपी शर्मा ने काफी मदद की और इन्हें कई सामग्रियां उपलब्ध कराई। तीन साल लगातार मेहनत करने के बाद 2026 के 17 सितंबर को इनका शोध वर्क पूरा हुआ और इनका फाइनल रिजल्ट आया। सुशांत कुमार रांची कालेज के फिजिक्स विभाग के पहले सेकेंड टापर रहे हैं।
पढ़ने का है पैशन, उम्र नहीं है बाधा
सुशांत कुमार घोष का कहना है कि मेरा पढ़ने और पढ़ाने का शौक रहा है, जब नौकरी करते थे तो पढ़ नहीं पाते थे। मैंने 36 साल पहले 1987 में एमएससी किया था और इसके बाद पीएचडी करने का मौका ही नहीं मिला। लेकिन सेवानिवृत होने के बाद पढ़ने का मौका मिला तो मैं इसे नहीं छोड़ना चाहता था।
इसलिए मैंने पढ़ाई के दौरान उम्र को रास्ते का बाधा नहीं बनने दिया। क्योंकि मुझे किसी ने बताया कि अमेरिका के एक डेविड स्टेनर ने 89 साल की उम्र में पीएचडी किया है।
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