रांची, जासं। केंद्र सरकार के द्वारा फाॅरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट, ई-काॅमर्स तथा माॅडर्न ट्रेड को बढ़ावा देने से देश में डिस्ट्रीब्यूटर एवं ट्रेडर्स की समस्या काफी बढ़ गई है। इसे लेकर झारखंड कंज्यूमर प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसियेशन (जेसीपीडीए) ने केंद्र सरकार से इसके कारणों की समीक्षा का आग्रह किया है। जेसीपीडीए के सचिव संजय अखौरी ने कहा कि यदि केंद्र ने समय रहते परंपरागत खुदरा व्यापार को खत्‍म होने से नहीं रोका तो इस देश के छोटे-छोटे व्यापारी खत्म हो जाएंगे।

केंद्र द्वारा एफडीआइ, ई-काॅमर्स तथा माॅडर्न ट्रेड को बढ़ावा देने से देश में डिस्ट्रीब्यूटर एवं ट्रेडर्स का कारोबार ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। संजय अखौरी ने कहा कि केंद्र सरकार को बड़े-बड़े केंद्रीय प्रोजेक्ट जैसे सड़क निर्माण, स्वदेशी आधारभूत संरचना, मेडिकल खोज एवं अस्पताल तथा शिक्षा के क्षेत्र में विदेशी निवेश को इजाजत देनी चाहिए। जबकि केंद्र सरकार द्वारा विदेश के उद्योगपतियों को इन बड़े प्रोजेक्टों में निवेश के बजाय अन्य छोटे-छोटे प्रोजेक्ट में निवेश की इजाजत धड़ल्ले से दी जा रही है।

केंद्र की इस नीति ने किराना ग्राॅसरी व अन्य छोटे कारोबार को चौपट कर दिया है। कोविड काल के इस दौर में व्यापारियों का तो इस ट्रेड में सरवाइव कर पाना भी मुश्किल हो गया है। इससे डिस्ट्रीब्यूटर भी प्रभावित हुए हैं, उन्हें भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह देखें तो जीवन-यापन के लिए डिस्ट्रीब्यूटर को एक के बजाय अनेक कंपनियों की डिस्ट्रीब्यूटरशीप लेनी पड़ रही है। कोविड काल के इस दौर में एक ही कंपनी की डिस्ट्रीब्यूटरशीप अथवा एजेंसी से जो कमिशन छोटे व्यापारियों को हासिल हो रही है, इससे उनके लिए जीवन-यापन कर पाना कठिन हो गया है।

इसी से प्रभावित होकर युवा लोग इस बिजनेस में आने से परहेज कर रहे हैं जो चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि परंपरागत व्यापार की बदौलत हर साल देश में लाखों रोजगार का सृजन होता है लेकिन मौजूदा हालातों के चलते डिस्ट्रीब्यूटर के लिए रोजगार दे पाना असंभव हो गया है जिससे देश में बेरोजगारी एक विकराल रूप ले सकती है। परम्परागत खुदरा व्यापार बंद होने से बैंकों को भी खासा नुकसान उठाना पड़ेगा। सरकार को जल्द इसके कारणों की समीक्षा करनी चाहिए।

Edited By: Sujeet Kumar Suman