रांची, राज्‍य ब्‍यूरो। Jharkhand E-Pass @ epassjharkhand.nic.in, Jharkhandtravel.nic.in झारखंड सरकार ने लॉकडाउन के दौरान सख्ती बरतनी शुरू कर दी है और अब कहीं भी आने-जाने के लिए ई-पास को जरूरी बना दिया गया है। सरकार ने इसके संकेत पहले ही दे दिए थे और लोगों को इतना वक्त भी दिया था कि वे अपने ठिकाने तक पहुंच जाएं। इसके बावजूद कई कारणों से आम लोगों को घर से निकलना ही पड़ेगा और इनके लिए पास बनाना जरूरी कर दिया गया है।

इस फैसले से सड़कों पर लोगों की भीड़ कम करने में सरकार को सफलता तो मिली लेकिन हड़बड़ी में लिए गए फैसले पर दो-तीन संशोधनों के बावजूद सवाल उठ रहे हैं। सरकार को इस बात के पहले ही संकेत मिल गए थे कि लोग पास के लिए उमड़ पड़ेंगे लेकिन इससे बचने के लिए कोई प्रबंध नहीं किया गया और अंतत: पास के लिए अफरातफरी मच ही गई। लाखों की संख्या में लोग पास बनवाने से वंचित भी रह गए हैं। ऐसे फैसलों पर पुनर्विचार भी किया जाना कतई गलत नहीं है। इससे आम लोगों का हित सधेगा।

सरकार ने लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पास को अनिवार्य बनाया और इसे हासिल करने में पहले जैसी कोई परेशानी भी नहीं है लेकिन भारी भीड़ को नियंत्रित करने के उपाय नहीं किए जा सके। यही कारण है कि सरकार के इस फैसले में अब तक तीन-चार संशोधन हो चुके हैं। सबसे पहला काम यह था कि सुनिश्चित किया जाए कि अकारण लोगों को पास बनवाने की जरूरत नहीं पड़े।

मसलन जिन दुकानों को खोलने की सरकार ने अनुमति दी है, उसके संचालक को दुकान के निबंधन के कागजात के आधार पर आने-जाने की सुविधा दी जाए। जिन दफ्तरों को खोलने की इजाजत दी गई है उनके कर्मियों को प्रबंधन से प्राप्त पत्र के आधार पर आने-जाने दिया जाए और सरकारी कर्मियों अथवा अन्य कार्यालयों के कर्मियों को उनके पहचान पत्र के आधार पर अनुमति दी जाए।

इससे बड़ी भीड़ कम होती। ऐसा नहीं होने से क्या हुआ, सभी जानते हैं। रातभर लोगों ने पास बनवाने के लिए प्रयास किए हैं और कइयों ने थककर पास बनवाने का फैसला ही त्याग दिया। सरकार के लिए राहत की बात यह है कि सभी लोगों ने इस फैसले काे माना लेकिन सरकार की व्यवस्था जवाब दे गई जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ गई।

झारखंड हाई कोर्ट जल्‍द करेगा ई-पास के खिलाफ जनहित याचिका पर सुनवाई

झारखंड हाई कोर्ट में ई-पास के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल की गई है। राजन कुमार सिंह ने अपने अधिवक्‍ता अनूप अग्रवाल के जरिये दायर जनहित याचिका में ई-पास को निजता का हनन बताते हुए अदालत से इसे रद किए जाने की मांग की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पहले ही लॉकडाउन में सिर्फ आवश्‍यक सामान की दुकानें खुली हैं, ऐसे में कोई भी व्‍यक्ति आवश्‍यक काम से ही घर से बाहर निकलेगा। फिर ई-पास की व्‍यवस्‍था क्‍यों लागू की गई है। याचिका में दलील दी गई है कि लाखों लोग गांव में रहते हैं, जिनके पास स्‍मार्टफोन नहीं है, आखिर वे कैसे अपना ई-पास बनवाएंगे। अदालत से इस मामले में जल्‍द सुनवाई का आग्रह किया गया है।

ई-पास पर लिया गया फैसला जन विरोधी : भाकपा

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के रांची जिला मंत्री सह राज्य कार्यकारिणी सदस्य अजय सिंह ने रविववार को एक बयान जारी कर राज्य में लागू ई-पास सिस्टम की आलोचना की है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 16 मई से 27 मई तक स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह के दौरान प्रत्येक व्यक्ति के लिए ई-पास की अनिवार्य किया है। अगर ई-पास नहीं होगा तो कानूनी कार्रवाई होगी।

अजय सिंह का कहना है कि ई-पास पर लिया गया यह फैसला जन विरोधी है। यह कहीं से भी न्यायोचित नहीं है। इससे हजारों दिहाड़ी मजदूर, प्रतिदिन सब्जी-फल और पत्ते बेचकर जीविका चलाने वाले गरीब प्रभावित होंगे। सरकार जनहित में कई अच्छे और कड़े कदम उठा रही है, जो सराहनीय भी है। लेकिन, ई-पास सभी के लिए आवश्यक हो इसपर फिर से विचार करने की आवश्यकता है। हाट बाजारों, सब्जी विक्रेताओं और मीडिया-कर्मियों को इस फैसले से दूर रखें व जनहित में ई-पास की अनिवार्यता को समाप्त करें। 

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