रांची, जासं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण की शुरुआत हो चुकी है। आम लोगों के सहयोग से चरणबद्ध तरीके से वैक्सीनेशन कार्य पूरा होगा। कोरोना काल में कई बड़े देशों के चेहरे उजागर हो गए। इस दौरान आर्थिक रूप से सक्षम देश जहां खुद की चिंता में डूबे रहे, वहीं भारत ने मानवता का परिचय देते हुए कुवैत, अफ्रीका आदि देशों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई। डाक्टर से लेकर दवा तक दी।

धर्मेंद्र प्रधान शनिवार को रांची के धुर्वा स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांतीय अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। मंत्री ने कहा कि अमेरिका भी महामारी को रोक नहीं पाया। उसके पास दूरदृष्टि और अनुभव का अभाव था। हमने अमेरिका को मानवता के नाते दवाइयां उपलब्ध कराई। भारत ने दुनिया का नेतृत्व करते हुए इससे पार पाने की राह दिखाई।

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500 सालों के संघर्ष के बाद साकार हुआ राम मंदिर

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आक्रांताओं ने भारत की संस्कृति व सभ्यता को मिटाने का हर संभव प्रयास किया। कई ऐतिहासिक धरोहरों को ध्वस्त कर दिया, लेकिन हमारी संस्कृति, सभ्यता को मिटा नहीं सका। करीब 500 सालों के संघर्ष के बाद अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। देश में एक नए दौर की शुरुआत हो चुकी है। झारखंड को प्रकृति ने दोनों हाथों से वैभव दिया है। इसका सदुपयोग और विकास होना चाहिए।

कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज जो कुछ भी हूं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में काम करने के अनुभव की वजह से हूं। संगठन में कार्य करते हुए जो अनुभव मिलता है, वह बड़े से बड़े विश्वविद्यालयों में पढ़कर नहीं मिलता। विद्यार्थी परिषद विचार प्रवाह और सामाजिक शक्ति की पाठशाला है।

आत्मनिर्भर व स्वाभिमानी बनें युवा : अशोक भगत

विकास भारती के सचिव अशोक भगत ने कहा कि 1970 से विद्यार्थी परिषद से जुड़ाव हुआ। तब से आज तक खुद को कार्यकर्ता मानता हूं। देश के निर्माण में परिषद की बड़ी भूमिका रही है। कार्य पद्धति और संस्कार का ही असर है कि आज परिषद के कार्यकर्ता देश का नेतृत्व कर रहे हैं। विद्यार्थी परिषद ने जेएनयू का मिथक तोड़ा, बंगलादेशी घुसपैठियों के खिलाफ आवाज उठाई।

रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सभी को सरकारी नौकरी देना किसी भी सरकार के लिए संभव नहीं है। हमें आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी बनना होगा। नौकरी खोजने के बजाय रोजगार पैदा करने में विश्वास करें। जहां लोग रोजगार का रोना रो रहे हैं वहीं बड़ी संख्या में ऐसे भी युवा हैं जो गांव में कृषि से जुड़े छोटे-मोटे कार्य कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर मर्ज की दवा सरकार के पास नहीं है। समाज को सशक्त बनाना होगा, तभी देश का वास्तविक विकास हो सकेगा।

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