रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand Land Mutation Bill विधानसभा में लैंड म्यूटेशन बिल को लेकर पीछे हटी राज्य सरकार ने इसे गलत और सही का आकलन करने की प्रक्रिया से जोड़ा है। शुक्रवार को इस बाबत सत्तारूढ़ दलों की बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार सही और गलत का आकलन करने के बाद ही कोई विधेयक लाएगी। लोगों के सुझाव पर विचार करना आवश्यक है। सरकार सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी।

जानकारी के मुताबिक विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री के कार्यालय कक्ष में सत्तारूढ़ दलों की बैठक में विधायकों ने भी एक स्वर में लैंड म्यूटेशन बिल के मौजूदा स्वरूप का विरोध किया। बैठक के बाद राज्य सरकार के मंत्रियों और सत्तापक्ष के विधायकों ने खुलकर अपना पक्ष रखा। संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर ने कहा कि जो त्रुटियां बताई गई है, सरकार उसे दूर करने के बाद ही बिल पर कोई निर्णय लेगी।

उधर वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने कहा कि हमलोग बिल के मौजूदा स्वरूप के पक्ष में नहीं हैं। इसे लागू करने से पहले से मौजूद जमीन संबंधित दिक्कतें और बढ़ जाएंगी। ऐसे में इसमें संशोधन कर फिर से प्रारूप तैयार करने की जरूरत है। झामुमो के विधायक विधायक स्टीफन मरांडी ने कहा कि लोगों की सरकार ने अपेक्षाएं बढ़ी है। इसे पूरा नहीं किया गया तो खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

वहीं मथुरा महतो ने कहा झामुमो के कई विधायक बिल के मौजूदा स्वरूप के पक्ष में नहीं हैं। बैठक में अल्पसंख्यक स्कूलों के अनुमोदन समेत नियुक्ति नियमावली में संशोधन, जेएसएलपीएस के कार्यों की समीक्षा और बीपीएम के खर्च की समीक्षा, पौधारोपण के लिए एनजीओ को हुए भुगतान की समीक्षा आदि पर चर्चा की गई।

किसने क्या कहा

जो जरूरी बिल है उसे सरकार बहुत सोच समझकर लाएगी। यह छोटा सत्र है इसलिए जरूरी विधेयक ही लाए जा सकेंगे। लैंड म्यूटेशन बिल को लेकर सरकार हड़बड़ी में नहीं है।  -चंपाई सोरेन, परिवहन मंत्री।

आम जनता की भावनाओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया है। सरकार कोई भी कदम बहुत फूंक-फूंककर उठाएगी। बिल में सुधार और नए प्रावधान भी जोड़े जाएंगे। हेमंत सरकार जनता की, जनता द्वारा और जनता द्वारा चलने वाली सरकार है। -बन्ना गुप्ता, स्वास्थ्य मंत्री।

बिल पर सदस्यों ने जो सुझाव दिए हैं, सरकार उसपर विचार करेगी। अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए अनुपूरक बजट पेश कर दिया गया है। बिल आएगा या नहीं इसके बारे में जानकारी दे दी जाएगी। -मिथिलेश कुमार ठाकुर, पेयजल मंत्री।

बंधु तिर्की रहे मुखर

विधायक बंधु तिर्की ने विधानसभा में बिल पेश नहीं होने पर मुख्यमंत्री का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि बिल विधानसभा के मानसून सत्र में मौजूदा स्वरूप में नहीं आएगा। उन्होंने सत्तारूढ़ दल की बैठक में सरना कोड का मुद्दा उठाया और पिछली सरकार में जमीन से संबंधित मामलों की समीक्षा करने की मांग भी रखी। सुझाव दिया कि बिहार के बिल का अंगीकार करने की प्रथा बंद होनी चाहिए। दोनों राज्यों की जमीन की प्रकृति अलग है। उन्होंने कहा कि आइएएस अधिकारी अधिक बुद्धिमानी का परिचय नहीं दें। जमीन संबंधित कानून में झारखंड के विशेषज्ञों की राय को शामिल किया जाना चाहिए।

सरयू बोले, सरकार भयभीत लग रही

पूर्व मंत्री सरयू राय ने कहा कि बिल को सदन में लाना सरकार के ऊपर है। अगर कैबिनेट में बिल पास कर दिया गया है तो सदन में इस बिल पर चर्चा होनी चाहिए। इससे सदस्य बिल की खामियों पर बोल सकेंगे और सरकार को सुझाव दे सकेंगे। संसदीय कार्यप्रणाली में यह आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगा रहा है कि सरकार थोड़ा भयभीत हो गई है।

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