जागरण संवाददाता, रांची : डेंटल कॉलेज में बीडीएस छात्रों का भविष्य खतरे में है। कॉलेज में संसाधनों के अभाव में डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम कई बिंदुओं पर आपत्ति जता चुकी है। डेंटल कॉलेज में 47 चिकित्सकों का पद सृजित है लेकिन, बहाली सिर्फ 33 का ही हुआ है। अब तक 14 चिकित्सकों के पद खाली हैं। ऐसे में पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। मामला अब तक स्वास्थ्य विभाग में लटका है। समय रहते बहाली नहीं होने पर थर्ड ईयर में जानेवाले छात्रों को मान्यता नहीं दी जाएगी।

31 जनवरी तक डीसीआइ की आपत्तियों पर कर लेना है काम

रिम्स में हाल ही में डीसीअीई के निरीक्षण और उनके द्वारा उठाए गए सवाल पर जल्द से जल्द काम पूरा कर लेना है। बताया जा रहा है कि बीडीएस थर्ड ईयर की मान्यता को लेकर जो भी कमियां हैं उसे दूर कर लेना है। चाहे मामला नियुक्ति का हो या फिर डेंटल से जुडे़ उपकरणों की खरीदारी का।

कर्मियों की संख्या है कम : डेंटल कॉलेज में डॉक्टरों के साथ-साथ कर्मियों की भी कमी है। डेंटल टेक्निशियन के छह, डेंटल हाइजिनिस्ट 3, रेडियोग्राफर 2, डेंटल चेयर साइड असिस्टेंट 10, ऑफिस असिस्टेंट 8, ऑफिस सुप¨रटेंडेंट 1, एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिसर 1, पीआरओ 1 और सेक्रेटरी टू दी प्रिसिंपल का भी एक पद सृजित है। किसी भी पद पर अब तक एक भी कर्मी की स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है। तीन पदों पर ही एक-दो कर्मियों की नियुक्ति हुई, वह भी आउटसोर्सिग से। चिकित्सकों को खुद ही रेडियोग्राफर, पारा मेडिकल स्टाफ का काम करना पड़ता है।

कई छात्राओं को नहीं मिला है छात्रावास : बीडीएस की पढ़ाई कर रही छात्राओं को छात्रावास नहीं मिला है। ऐसे में छात्राओं को पढ़ाई करने और रहने की समस्या उत्पन्न हो गई है। छात्रावास का एक भवन बना है लेकिन वहां बिजली नहीं है। 'डीसीआइ ने कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई है। चिकित्सक और कर्मियों की बहाली नहीं होने से बीडीएस की मान्यता पर डीसीआइ ने सवाल उठाया है। साथ ही कुछ महत्वपूर्ण उपकरणों की कमी को दूर करने को कहा है। इनकी कमियां दूर होने पर ही डीसीआइ थर्ड ईयर को मान्यता मिल सकेगी। इस दिशा में कॉलेज प्रबंधन लगा हुआ है।'

डॉ. पंकज गोयल

प्राचार्य, डेंटल कॉलेज, रिम्स

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