रांची। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कुरियन जोसेफ ने कहा कि हमें संस्थागत विवाह को बचाने का प्रयास करना होगा। इसके लिए मध्यस्थता, समझौता और परामर्श का सहारा लिया जा सकता है। जजों को भी ऐसे मामलों के प्रति संवेदनशील होना होगा।

त्वरित न्याय देने की बजाय परिवार को बचाने की संभावना को तलाशना चाहिए। एक्ट में भी इसका प्रावधान है। जस्टिस कुरियन शनिवार को फ‌र्स्ट नेशनल मीट फॉर सेंसिटाइजेशन ऑफ फैमिली कोर्ट मैटर विषय पर आयोजित कार्यशाला में लोगों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि विवाद वाले अधिकतर मामले प्रेम विवाह करनेवालों व शिक्षित लोगों के हो रहे हैं। विवाह के कुछ दिनों बाद विवाद होता है और दंपती अलग होना चाहता है। हमें इसके प्रति संवेदनशील होना होगा और मानवीय तरीका अपनाना होगा। इसके लिए हमें विवाद के मूल कारण को जानना होगा और उसे दूर करने की कोशिश करनी होगी।

क्योंकि इन मामलों में जज द्वारा दिया गया निर्णय किसी के जीवन से जुड़ा होता है। सुप्रीम कोर्ट में इनको सुलझाने के लिए अलग से बेंच बनाने पर भी विचार हो रहा है। सेमिनार में फैमिली कोर्ट से जुड़े मामलों में दिए गए मुख्य आदेशों की पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। इसके साथ ही क्षेत्रीय सम्मेलन के निष्कर्षो और ट्रेनिंग मॉडयूल का भी विमोचन किया गया।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने कहा कि पति व पत्नी भावनात्मक रूप से जुड़े रहते हैं। इसके कारण उनके बीच का विवाद जटिल होता है, जिसे संवेदनशीलता के साथहल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब समय बदल रहा है।

लिव इन रिलेशनशिप का विवाद नया : चीफ जस्टिस

झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अनिरुद्ध बोस ने कहा कि अब समाज का स्वरूप बदल रहा है। एक ही लिंग में विवाह और लिव इन रिलेशनशिप का चलन बढ़ा है। इनसे संबंधित मामले भी फैमिली कोर्ट में आएंगे। इनके प्रति भी हमें संवेदना के साथ विचार करना होगा। इसके लिए फैमिली कोर्ट के जजों को अपडेट होना होगा।

झारखंड में सम्मेलन गर्व की बात: जस्टिस पटेल

झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस डीएन पटेल ने कहा कि झारखंड में फैमिली कोर्ट के मामलों को लेकर देश का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन हो रहा है। यह झारखंड के लिए गर्व की बात है।

इस दौरान हाई कोर्ट के जस्टिस एचसी मिश्र, जस्टिस अपरेश कुमार सिंह, जस्टिस डॉ. एसएन पाठक, जस्टिस राजेश शंकर, जस्टिस केपी देव, जस्टिस अनुभा रावत चौधरी, रजिस्ट्रार जनरल अंबुजनाथ, महाधिवक्ता अजीत कुमार, अपर महाधिवक्ता जयप्रकाश सहित अन्य वरीय अधिवक्ता व न्यायिक पदाधिकारी मौजूद रहे।

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