रांची, शक्ति सिंह। मार्केट के दस्तूर के मुताबिक थोक में कोई सामान लेते हैं, तो कीमत कम होती है, लेकिन रेलवे में इसके उलट हो रहा है। यहां ज्यादा संख्या में रेलवे टिकट लेने पर रेलवे ज्यादा पैसे वसूल रहा है। रांची-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस की टिकटों में यह शिकायत देखने को मिल रही है। बल्क में टिकट कटाने वाले यात्रियों ने रेलवे से इसकी शिकायत की है। यह गड़बड़ी रेलवे बुकिंग काउंटर से टिकट कटाने के दौरान हो रही है। पांच-छह मामलों में इस तरह की गड़बड़ी की सूचना रेलवे को मिली है।

ज्यादा हो रही वसूली : बल्क टिकट की मार झेल चुके एक सज्जन ने बताया कि पांच सितंबर को उन्होंने नई दिल्ली से रांची के लिए राजधानी एक्सप्रेस की थर्ड एसी में छह टिकट कटाए। टिकट 12 दिसंबर का है। छह टिकटों के एवज में रेलवे ने उनसे 17010 रुपये वसूले। यानी प्रति टिकट 2835 रुपये, जबकि उस दिन निर्धारित किराया प्रति व्यक्ति 2300 रुपये से भी कम था।

22 अक्टूबर को 12 दिसंबर का यही टिकट प्रति व्यक्ति 2335 रुपये पर उपलब्ध है। इस हिसाब से रेलवे ने प्रति टिकट 500 रुपये से भी अधिक वसूले। छह टिकट लिए तो तीन हजार से अधिक का चूना। टिकट काउंटर से लिया गया है। जानकार बताते हैं कि सिर्फ राजधानी एक्सप्रेस नहीं अन्य ट्रेनों के किराए के मामले में भी इसी तरह की समस्या है। शिकायत कुछ लोग ही करते हैं।

संशय में अधिकारी : ज्यादा शुल्क लेने का मामला जब यात्रियों की समझ में नहीं आया तो इसकी शिकायत रेलवे के अधिकारी से की गई। शिकायत का स्वरूप देखकर अधिकारी भी भौंचक रह गए। उनका मानना है कि संभवत: यह गड़बड़ी सॉफ्टवेयर की है या फिर डायनेमिक फेयर का भी एक हिस्सा है। हालांकि डायनेमिक फेयर का तर्क ऐसे काम नहीं करता कि जब एक टिकट का मूल्य कम है तो ज्यादा टिकट लेने पर बढ़ोतरी कैसे हो जाएगी।

डायनेमिक फेयर का तर्क इसलिए भी काम नहीं करता कि आज की तिथि में भी किराया 2300 के आसपास है जबकि यात्री से प्रति टिकट 2835 रुपये एक माह पूर्व वसूला जा चुका है। रेलवे अधिकारी भी इस मामले पर कुछ साफ साफ नहीं कह पा रहे हैं। शिकायतों की संख्या बढ़ी तो रेलवे अधिकारियों ने आपस में गोपनीय तरीके से देर तक मंथन किया, मगर कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।

पहले भी होती रही है चूक : रेलवे में लापरवाही और चूक पहले भी होती रही है। पहले ट्रेन रद होने पर ई-टिकटिंग की राशि यात्री के बैंक के खाते में स्वत: नहीं जाती थी। राशि की वापसी के लिए यात्रियों को आवेदन करना पड़ता था, जबकि ट्रेन रेलवे की गड़बड़ी के कारण रद होती थी। मामला संज्ञान में आने के बाद रेलवे ने व्यवस्था में सुधार किया। इसी तरह का मामला पत्रकारों के टिकट बुकिंग में भी देखने को मिला था, जहां पत्रकारों को दिव्यांग की श्रेणी में रखा जाता था। इस मामले में भी रेलवे ने नोटिस लेते हुए सॉफ्टवेयर में सुधार के लिए कदम उठाया।

गंभीरता से देखेंगे मामले को : अगर बल्क टिकट बुकिंग में राशि अधिक ली जा रही है तो मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। हालांकि, मामला सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम (क्रिस) के स्तर का है, जिसका मुख्यालय दिल्ली में है। इस मसले में उनसे संपर्क साधा जाएगा, ताकि समस्या का निदान निकाला जा सके। नीरज कुमार , सीपीआरओ, रांची रेल मंडल, दक्षिण पूर्व रेलवे।

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