रांची : 23 सितंबर को पूरे देश के लिए लांच हो रही 'आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य अभियान योजना' के तहत लाभुक परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ्त इलाज का लाभ स्वत: मिलना शुरू हो जाएगा। इसके लिए न तो कोई इनरॉलमेंट या अन्य कोई कागजी प्रक्रिया पूरी करनी होगी, न ही उन्हें कोई स्मार्ट कार्ड (जैसा राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में था) बनाने की आवश्यकता होगी। खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे में आनेवाले सभी 57 लाख परिवार केवल राशन कार्ड दिखाकर सूचीबद्ध अस्पतालों में निश्शुल्क इलाज करा सकेंगे, बशर्ते उनके नाम राज्य सरकार के डाटाबेस में शामिल हो। शनिवार को नामकुम स्थित आइपीएच सभागार में आयुष्मान भारत को लेकर आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला में यह जानकारी दी गई। इसमें निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों और तमाम स्वास्थ्य पदाधिकारियों को प्रधानमंत्रंी नरेंद्र मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना तथा इससे जुड़ने की विस्तृत जानकारी दी गई। स्वास्थ्य सचिव निधि खरे ने कहा कि लगभग 285 सरकारी अस्पताल इस योजना में सूचीबद्ध किए जा रहे हैं। 70 फीसद लोग निजी अस्पतालों में इलाज कराते हैं, इसलिए निजी अस्पतालों के लिए भी एक बड़ा अवसर है। उन्होंने यह भी कहा कि निजी अस्पतालों के सहयोग के बिना यह अभियान सफल नहीं हो सकता। कहा, प्रधानमंत्री ने विश्व के इस सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना की लांचिंग के लिए झारखंड को चुना है, इसलिए इसमें हम सबकी जिम्मेदारी है कि यह योजना पारदर्शी ढंग से चले और किसी तरह का भ्रष्टाचार इसमें न पनपे। कार्यशाला को झारखंड राज्य आरोग्य सोसाइटी के अपर निदेशक अभिषेक श्रीवास्तव, केंद्र से आए तकनीकी पदाधिकारी अरुण कुमार ने भी संबोधित किया। समय पर अस्पतालों को होगा भुगतान झारखंड राज्य आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक दिव्यांशु झा के अनुसार, इस योजना में मरीजों के इलाज के बाद अस्पतालों को बीमा कंपनी या ट्रस्ट द्वारा समय पर भुगतान किया जाएगा। इसमें अकारण पेमेंट रोकने पर प्रति सप्ताह एक फीसद की पेनाल्टी का प्रावधान किया गया है। उनके अनुसार, अभी तक 350 से अधिक निजी अस्पतालों ने सूचीबद्ध होने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए हैं। योजना की खासियत -यदि कोई अस्पताल इस योजना में सूचीबद्ध नहीं है वहां कोई लाभुक परिवार का मरीज इलाज के लिए आता है तो उसे सूचीबद्ध अस्पतालों में भेजना होगा। -1,350 प्रकार की बीमारियों में निश्शुल्क इलाज होगा। सभी में अस्पतालों को मिलने वाली राशि भी तय कर दी गई है। -ओपीडी, ड्रग्स से संबंधित बीमारियां, कॉस्मेटिक सर्जर, आर्गन ट्रांसप्लांट, आइबीएफ आदि इसमें शामिल नहीं हैं। - कई चिह्नित बीमारियों में इलाज शुरू करने के लिए अस्पताल को बीमा कंपनी (एक लाख तक के मामले में) या ट्रस्ट (एक लाख से अधिक तथा पांच लाख तक) से पूर्व स्वीकृति लेनी होगी। -बीमा कंपनी या ट्रस्ट ऐसे मामलों में छह घंटे के भीतर स्वीकृति या अस्वीकृति देंगे। इस अवधि तक निर्णय नहीं लेने पर स्वत: इलाज की स्वीकृति मिल जाएगी। -बीमा कंपनी या ट्रस्ट द्वारा किए गए रिजेक्शन की ऑडिट की जाएगी। अकारण रिजेक्शन पर दंड का भी प्रावधान है। होनेवाले पेमेंट, मरीजों की मृत्यु आदि की भी ऑडिट की जाएगी। ----

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