रांची, जेएनएन। राजद प्रमुख लालू प्रसाद हलकान-परेशान हैं। पशुपालन घोटाले के आरोप में वे सजायाफ्ता हैं। फिलहाल वे अपनी बीमारी को लेकर रांची के सरकारी अस्पताल में उपचार करा रहे हैं। कभी सत्ता के शीर्ष पर रह चुके लालू प्रसाद को न दिन का चैन है न रात का आराम। हाल के कुछ महीने में उनका अस्पताल और जेल का लगातार चक्कर उन्हें थका रहा है। रही-सही कसर सरकारी अस्पताल की व्यवस्था ने पूरी कर दी है। लालू प्रसाद रांची के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में भर्ती हैं लेकिन वहां की सुविधाएं उन्हें रास नहीं आ रही है। रात में उनकी नींद आवारा कुत्तों के भौंकने से टूट जाती है। उनको कई बीमारियों ने घेर रखा है।

इस परिस्थिति में लालू प्रसाद ने खुद को अलग वार्ड में शिफ्ट करने का आवेदन दिया था। अस्पताल प्रबंधन ने उनकी गुजारिश को जेल प्रशासन को भेजा। उन्हें दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने पर सहमति दे दी है लेकिन उनकी परेशानी कम होती नहीं दिखती। वे चाहे कितना भी कहें कि उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया जा रहा है लेकिन उनपर चल रहे मामले काफी पुराने हैं। मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप उनके खिलाफ है। लालू प्रसाद को अदालत ने इलाज के लिए प्रोविजनल बेल भी दी। इस दौरान उन्होंने मुंबई में अपना इलाज कराया।

अदालत उन्हें सजा की अवधि में राजनीतिक बयानों को लेकर हिदायत दे चुकी थी। लेकिन राजद सुप्रीमो इस बार जब सरेंडर करने रांची आए तो वे बयानबाजी पर अपना मोह नहीं छोड़ पाए। उन्होंने जमकर केंद्र सरकार को लताड़ा और अपने अंदाज में ताने कसे। पूर्व के मुकाबले अब लालू प्रसाद का करिश्मा भी थोड़ा कम होता दिख रहा है। झारखंड में उनका राजनीतिक आधार भी सीमित है। ऐसे में लंबी अवधि तक उनका सक्रिय राजनीति से दूर रहने का असर राजद पर पड़ सकता है।

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