जागरण संवाददाता, रांची : रांची विश्वविद्यालय में चांसलर पोर्टल के माध्यम से हो रहे नामांकन में गड़बड़ी थमने का नाम नहीं ले रहा है। पोर्टल का एक कारनामा खत्म भी नहीं होता है कि दूसरा सामने आ जाता है। अब नया मामला सामने आया है, बिना स्नातक पास विद्यार्थियों का पीजी में नामांकन के लिए सूची में नाम आने का। पोर्टल में पांच सेमेस्टर का अंक डालने पर भी नामांकन सूची में नाम आ गया है। पोर्टल के इस कारनामे का खुलासा गुरुवार को विवि मुख्यालय में प्रभारी कुलपति डॉ. कामिनी कुमार की पीजी विभागाध्यक्षों के साथ बैठक में हुआ। पीजी जियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. उदय कुमार ने बताया कि उनके विभाग में आधा दर्जन ऐसे विद्यार्थी नामांकन के लिए पहुंचे थे जो स्नातक उत्तीर्ण नहीं थे, लेकिन उनका नाम नामांकन सूची में था। छात्रों ने चांसलर पोर्टल के माध्यम से नामांकन फार्म जमा करने वक्त छह में से पांच सेमेस्टर के ही अंक दिए थे, लेकिन नामांकन सूची में उनका नाम आ गया है। ये विनोबा भावे विवि के विद्यार्थी हैं। वीसी ने विभागाध्यक्षों से ऐसे विद्यार्थियों को नामांकन नहीं लेने का निर्देश दिया। विभागाध्यक्षों ने बताया कि चार सितंबर से कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। बैठक में डीएसडब्ल्यू डॉ. पीके वर्मा, रजिस्ट्रार डॉ. अमर कुमार चौधरी, सभी पीजी विभागाध्यक्ष के अलावा आइएमएस, पीजी योगा, मास कॉम व परफार्मिग आर्ट विभाग के निदेशक भी थे। 12 तक भेजें इलेक्ट्रोल रोल

बैठक में प्रभारी कुलपति ने कहा कि पीजी में सीटें खाली बची हैं तो 10 सितंबर तक ऑफलाइन एडमिशन लेकर नामांकन बंद करें। साथ ही विभागाध्यक्षों से 12 सितंबर शाम तक इलेक्ट्रोल रोल की हार्ड व साफ्ट कॉपी डीएसडब्ल्यू कार्यालय में जमा करने को कहा ताकि छात्र संघ चुनाव की आगे की प्रक्रिया शुरू की जाए। बैठक में भूगोल विभागाध्यक्ष ने 17 सितंबर से होने वाली एम इन आरडी की परीक्षा का केंद्र अपने विभाग में रखने में असमर्थता जताया तो वीसी ने कहा कि सेंटर नहीं बदलेगा। कोई सुविधा चाहिए तो बताएं। रैगिंग की घटना न छुपाएं और न दबाएं

विभागाध्यक्षों से कहा गया कि यदि उनके विभाग में रैगिंग की घटना हो तो तत्काल इसकी जानकारी डीन को दें। आगे की कार्रवाई कमेटी करेगी। ऐसी घटना को किसी भी हाल में छुपाने या दबाने की कोशिश नहीं करें अन्यथा विभागाध्यक्ष पर कार्रवाई होगी। बैठक में बताया गया कि विवि ने यूजीसी को रैगिंग के इफेक्ट पर तीन इंट्री भेजा था जिसमें तीनों का चयन हुआ। यूजीसी ने विवि से तीनों के लिए कार्य करने वालों का विस्तृत जानकारी मांगी है ताकि एप्रिएशन सर्टिफिकेट दे सकें। विद्यार्थी देखेंगे हां या नां

रैगिंग के इफेक्ट पर तीन इंट्री में पहला डॉ. सुशील अंकन का नां या हां था। दूसरा आरयू के मास कॉम विभाग व तीसरा सेंट जेवियर्स कॉलेज ने भेजा था। नां या हां लघु फिल्म की सीडी को दो दिनों के भीतर सभी पीजी विभागों व कॉलेजों में भेजा जाएगा। इसे विद्यार्थियों को दिखाया जाएगा। इससे विद्यार्थी रैंगिंग के इफेक्ट के बारे में जानेंगे और इससे दूर रहेंगे। डीएसडब्ल्यू ने बताया कि झारखंड के किसी विवि में पहली बार इस तरह की लघु फिल्म दिखाई जाएगी। प्राचार्यो की बैठक आज

नामांकन को लेकर सभी अंगीभूत व एफिलिएटेड कॉलेज के प्राचार्यो की बैठक सात सितंबर को 12 बजे से होगी। इसमें सभी को भाग लेने को कहा गया है। बैठक में नामांकन पर निर्णय होगा।

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