रांची : निर्बाध विद्युत और जलापूर्ति के लिए झामुमो गुरुवार से सड़क पर उतरेगा। तयशुदा कार्यक्रम के तहत मोर्चा का आंदोलन एक सप्ताह तक चलेगा। इस अवधि में झामुमो के कार्यकर्ता राज्य स्तर पर धरना, प्रदर्शन तो करेंगे ही, काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रकट भी करेंगे। नुक्कड़ नाटक और घड़ा-सुराही फोड़ो कार्यक्रम का भी आयोजन होगा। मंगलवार को मीडिया से मुखातिब झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने यह जानकारी दी। उन्होंने झारखंड की रघुवर सरकार पर यह आरोप मढ़ा कि राज्य उनसे संभल नहीं रहा। आपातकाल सी स्थिति हो गई है। ऐसे में राज्य को सेना के हवाले कर दिया जाना प्रासंगिक होगा।

सुप्रियो ने कहा कि विद्युत संकट की वजह से सोमवार को रिम्स में 30 आपरेशन टल गए थे, मंगलवार को यह आंकड़ा भी पार कर गया। प्रधानमंत्री द्वारा 48 घंटे पूर्व देवघर में एम्स की आधारशिला रखे जाने के बाद उत्पन्न यह स्थिति हास्यास्पद है। सरकार इसे आंधी-तूफान और भारी बारिश से जोड़ती है, जबकि ऐसी स्थिति में आपदा प्रबंधन और दुरुस्त होना चाहिए। मौजूदा हालात को देख ऐसा प्रतीत होता है, यहां आपदा प्रबंधन नाम की कोई चीज ही नहीं है।

महासचिव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल-पेट्रोल की कीमत कम होने के बावजूद यहां कीमत बढ़ गई। आरबीआइ के अनुसार अगर राज्य सरकार अपना लाभांश छोड़ दे तो इस पर लगाम लग सकता है, लेकिन सरकार मौन है। इसी तरह कांटाटोली फ्लाईओवर के निर्माण से प्रभावित होने वाले रैयतों को न तो कहीं बसाया गया और न ही मुआवजा दिया गया। रमजान के पाक महीने में लोगों को परेशान किया जाना सरकार की नीयत पर सवाल उठाने को काफी है। झामुमो विकास विरोधी नहीं है। सरकार को चाहिए था कि पहले वह लोगों को विश्वास में लेती, फिर इस दिशा में आगे बढ़ती।

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