जागरण संवाददाता, रांची। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को झारखंड हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाई कोर्ट ने देवघर कोषागार मामले में लालू की जमानत याचिका खारिज कर दी है। सीबीआई कोर्ट ने लालू को सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिलने से लालू मायूस निकले। सीबीआइ कोर्ट से निकलकर लालू जेल गए। मीडिया से कहा कि आज कुछ नहीं बोलेंगे।

जानकारी के मुताबिक, जस्टिस अपरेश कुमार सिंह ने लालू को इस मामले में जमानत देने से इंकार कर दिया है। उन्होंने निचली अदालत के दस्तावेजों को देखने के बाद सीबीआइ की विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि लालू ने यदि आधी सजा काट ली होती तो उन्हें जमानत देने पर विचार किया जा सकता था। फिलहाल, उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती। लालू के वकील ने कहा था कि उनके मुवक्किल की उम्र ज्यादा हो गई है, उनकी सेहत भी ठीक नहीं रहती। परिवार से दूर रहना उनके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। कोर्ट ने उनकी इन दलीलों पर ध्यान नहीं दिया।

गौरतलब है कि देवघर कोषागार से फर्जी कागजात के आधार पर लाखों रुपये की निकासी के मामले में सीबीआइ की विशेष अदालत ने उन्हें 23 दिसंबर को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई थी। लालू ने सीबीआइ कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए इसे रद करने की अपील की थी। सजा के खिलाफ लालू की अपील पर कोर्ट ने नौ फरवरी को सीबीआइ की विशेष अदालत से उनकी सजा से जुड़े दस्तावेज मांगे थे। इसके बाद सुनवाई 23 फरवरी तक टाल दी थी।

चारा घोटालाः सीबीआइ के गवाह पर अदालत की सख्ती, दो गवाहों पर वारंट जारी

डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी से संबंधित मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद सहित अन्य आरोपी सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार कि अदालत में पेश हुए। इस मामले में सीबीआइ की ओर से गवाही दर्ज होनी थी, लेकिन गवाह नहीं पहुंचे। इस कारण गवाही नहीं हो सकी। अदालत ने गवाहों पर सख्ती जताते हुए उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है।

जिन गवाहों के खिलाफ वारंट जारी किया गया है उसमें बिहार स्थित गया के डीटीओ खुर्शीद आलम अंसारी और उत्तर प्रदेश स्थित एटा के रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी का नाम शामिल है। सीबीआइ के वरीय विशेष लोक अभियोजक बीएमपी सिंह ने बताया कि अदालत में गवाही के लिए खुर्शीद आलम अंसारी को समन किया गया था, लेकिन वे गवाही देने नहीं आए और न ही नहीं आने की कोई स्पष्ट जानकारी अदालत हो उपलब्ध कराई। खुद के बजाय गया के डीटीओ ने अपने लिपिक राजन कुमार को गवाही के लिए भेजा। जिनकी गवाही लेने से अदालत ने इन्कार कर दिया। कहा कि समन डीटीओ के नाम से जारी है। इसलिए गवाही देने उन्हें आना चाहिए था।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश स्थिति एटा के रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की ओर से अदालत को कोई सूचना नहीं दी गई कि वे गवाही देने के लिए अदालत में क्यों नहीं पहुंचेगे। ऐसे में अदालत ने दोनों गवाहों को नहीं आने पर गंभीरता जताई और गैर जमानतीय वारंट जारी किया।

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