रांची : अनुसूचित क्षेत्रों में फर्जी ग्राम सभा द्वारा जमीन अधिग्रहण किए जाने के खिलाफ रविवार को बिरसा चौक के पास आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के नेतृत्व में ग्राम प्रधानों ने धरना दिया। धरने में ग्रामीण क्षेत्रों से काफी लोग पारंपरिक हथियारों के साथ आए।

ग्रामीणों ने केंद्रीय कानून पी-पेसा 1996 की धारा 4 एम के आलोक में अनुसूचित क्षेत्रों में अपवादों और उपांतरणों के अधीन कुल सात शक्तियों के साथ विशेष ग्राम सभा स्थापित करने व सुप्रीम कोर्ट के द्वारा पारित समता जजमेंट 1997 के अनुसार आगामी ग्लोबल समिट का आयोजन अनुसूचित जनजातियों के हित में नहीं करने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में फर्जी ग्राम सभा के द्वारा अनुसूचित जन जातियों की जमीन का अधिग्रहण कर पूंजीपतियों और उद्योगपतियों को हस्तांतरित किया जा रहा है, जबकि पी-पेसा कानून के तहत आज तक ग्राम सभा की स्थापना आज तक नहीं हुई। साथ ही पी-पेसा कानून 1996 और समता जजमेंट 1997 के प्रावधानों का भी उल्लघंन है। फिर भी दोनों कानूनों के प्रावधानों में झारखंड विधानसभा में संशोधन कर दिया गया। जिसके कारण पूरे राज्य में अशांति और सामाजिक आक्रोश उत्पन्न हो गया है। मौके पर मंच के अध्यक्ष पीसी मुर्मू, वाल्टर भेंगरा, हिलारियुस सहित लातेहार, हजारीबाग, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, तमाड़, बंदगांव, बेड़ो, कोलेबिरा, तोरपा सहित अन्य क्षेत्रों से आए ग्रामीण सैकड़ों की संख्या में उपस्थित थे।