रांची, [आशीष झा]। बड़ी संख्या में कर्नाटक में फंसे झारखंड के मजदूरों को अब वहां पुलिस-प्रशासन वापस जाने से रोकने के लिए पुलिस सभी तरह से मशक्कत कर रही है। बुधवार को दोपहर में पुलिस संरक्षण में यह तक एनाउंस करवा दिया कि वापस लौटने पर सभी को क्वारंटाइन किया जाएगा और इसका अनुभव जेल से भी खराब है। दिन में एक रोटी और थोड़ा सा चावल खाने को मिलेगा और वहां पहुंचते ही छाती के बल लेटाकर रखा जाएगा। लोगों से कहा गया कि सभी अपने कार्यस्थल और फैक्ट्रियों पर वापस चले जाएं जहां जल्द ही निर्माण कार्य और उत्पादन शुरू हो जाएगा।

वहीं, गढ़वा जिले के 100 से अधिक मजदूरों के साथ बेंगलुरु में संबंधित कंपनी तथा पुलिस अमानवीय व्यवहार कर रही है। मजदूरों ने सोशल मीडिया के माध्यम से झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ऑडियो-वीडियो संदेश तथा आवेदन भेजकर घर वापसी की गुहार लगाई है। बेंगलूर के ग्रामीण इलाकों में फंसे जामताड़ा, गिरिडीह, देवघर, गढ़वा, गुमला आदि जिलों के मजदूरों ने दैनिक जागरण को स्टेशन के इर्द-गिर्द के हालात की पूरी जानकारी दी और ङ्क्षहदी में करवाई जा रही घोषणा का वीडियो क्लिप भी भेजा है। इधर, राज्य के मजदूरों की घर वापसी की प्रक्रिया जारी है। बुधवार को तीन ट्रेनों से 4019 श्रमिक झारखंड लौटे।

थाने में समझा दिया कि झारखंड नहीं जाना है

जिगनी इंडस्ट्रियल एरिया में फंसे जामताड़ा, देवघर, गिरिडीह आदि जिलों के मजदूरों महेश्वर मंडल, गोविंद मंडल, रवि मंडल और दिनेश मंडल ने बताया कि बुधवार को सभी थाना से अनुमति लेने गए थे जहां अनुमति नहीं देकर सिर्फ समझाने की कोशिश की गई कि झारखंड नहीं जाना है। इसके पहले अस्पताल में जांच रिपोर्ट लाने गए थे तो सभी को मुफ्त में मास्क दिया गया और अस्पताल में पुलिस ने कहा कि झारखंड जाकर फायदा नहीं है, यहीं पर रहिए। कहा गया कि सभी का पैसा और मोबाइल जमा करा लिया जाएगा।

जेल में रहना आसान है, क्वारंटाइन में नहीं। आप लोग स्वयं को कोसिएगा कि आखिर बेंगलुरु से वापस क्यों लौटे। घोषणा की जा रही है कि झारखंड सरकार से बात की जा रही है और इसके बाद लोगों को रोकने पर सहमति मिल सकती है। जिन कंपनियों में काम कर रहे थे वहां से भी संदेश आ रहा है लेकिन दो महीने से कोई सुध नहीं ले रहा था। एक बार अनाज देकर फैक्ट्री मालिक ने अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली थी। अब विश्वास नहीं हो रहा।

पिछली ट्रिप से लौटे साथियों ने कहा, कोई समस्या नहीं

दो दिन पहले ट्रेन से पहुंचे रिश्तेदारों ने फोन पर जानकारी दी है कि झारखंड में कहीं किसी प्रकार की समस्या सामने नहीं आ रही है। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य कर्मियों का व्यवहार बहुत अच्छा है। वहां फंसे लोगों ने कहा कि मुख्यमंत्री से ही आस है और अब हमें वही बचा सकते हैं।

मजदूरों ने कहा, कंपनी के इशारे पर हुई पिटाई

बेंगलुरु में फंसे मजदूरों का कहना है कि वे सभी अपने-अपने घर लौटना चाहते हैं, लेकिन जिस कंपनी में काम करते हैं उसका प्रबंधक हमें घर नहीं जाने देना चाह रहा है। इसके लिए कंपनी द्वारा स्थानीय पुलिस की मदद लेकर हम मजदूरों की बेरहमी से पिटाई की जा रही है। जानकारी के अनुसार जिले के रंका थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों के 70 मजदूर बेंगलुरु एयरपोर्ट पर बीआईएलपीजेड, प्रोजेक्ट, एलएनटी में काम करते हैं।

वहीं कर्नाटक के भागलकोट जिला के तालुका जमखंडी में शकर फैक्ट्री में सरिया सेटरिंग का काम कर रहे गढ़वा जिले के धुरकी व सगमा प्रखंड के 40 मजदूरों को कंपनी द्वारा बंधक बनाए जाने का मामला प्रकाश में आया है। समाजसेवी विजय केसरी ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि उक्त मजदूर जिस जगह रह रहे हैं वहां से रेलवे स्टेशन की दूरी 100 किमी है।

मजदूर रेलवे स्टेशन तक पहुंचाने की व्यवस्था करने तथा घर वापसी के लिए अपना निबंधन कराने जब सावडंगी पुलिस स्टेशन गए तो पहले तो पुलिस ने इन्हें चाय-पानी कराया। लेकिन कुछ देर के बाद कंपनी के साइड मैनेजर के वहां पहुंचते ही पुलिस ने इन मजदूरों पर लाठी चार्ज कर दिया। इसके बाद सभी मजदूरों को उनके क्वार्टर में भेजकर उन्हें वहां से निकलने पर पाबंदी लगा दी है।

मिथिलेश ठाकुर ने सीएम से की हस्तक्षेप की मांग

मजदूरों को जबरन बंधक बनाकर बेंगलुरु में काम कराया जा रहा है। झारखंड के पेयजल मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर उन्हें इसकी जानकारी दी है और हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आश्वास्त किया है कि वे वहां की सरकार से बात करेंगे तथा कंपनी एवं उसके प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करने को कहेंगे साथ ही सभी मजदूरों को सकुशल वहां से निकालकर उनके घर वापसी का रास्ता निकालेंगे।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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