विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

रामगढ़ में फैक्ट्रियों को मिलने वाला रियायती कोयला खुलेआम मंडी में बिक रहा, छोटे कारोबारियों और मजदूरों पर संकट

Published: Tue, 06 Oct 2026 06:35 PM (IST)

रामगढ़ की कुजू कोयला मंडी में फैक्ट्रियों को मिलने वाला रियायती कोयला खुलेआम बेचा जा रहा है, जिससे छोटे कारोबारियों ...और पढ़ें

रियायती कोयला खुलेआम मंडी में बिक रहा (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

रियायती कोयला खुलेआम मंडी में बिक रहा (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. फैक्ट्रियों को मिलने वाला रियायती कोयला खुलेआम बिक रहा।

  2. छोटे कोयला कारोबारी और मजदूरों की आजीविका संकट में।

  3. पूर्व विधायक ने विधानसभा में मुद्दा उठाया, पर कार्रवाई नहीं।

राजेश्वर/ रिक्की कुजू(रामगढ़)। कुजू कोयलांचल में विभिन्न फैक्ट्रियों का कोयला कुजू कोयला मंडी में खुलेआम बिक्री हो रही है। यूं कहें कि वन क्षेत्र के अवैध कोयला से भी बड़ा कोयला का अवैध कारोबार विभिन्न फैक्ट्री मालिकों द्वारा किया जा रहा है। इससे कुजू कोयला मंडी से जुड़े छोटे कोयला कारोबारियों के समक्ष जिविकोपार्जन का संकट उत्पन्न हो गया है। 

कोयला कारोबारियों का कहना है कि फैक्ट्री संचालन और रोजगार सृजन के उद्देश्य से केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत फैक्ट्री मालिकों को रियायती अथवा बेसिक मूल्य पर उपलब्ध कराए जाने वाले कोयले का उपयोग फैक्ट्री में करने के बजाय कुजू कोयला मंडी में खुलेआम बिक्री हो रही है। इससे छोटे कोयला कारोबारियों के कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। 

मजदूरों के समक्ष भी रोजगार का संकट

मजदूरों के समक्ष भी रोजगार का संकट गहराता जा रहा है। सरकार द्वारा फैक्ट्रियों को सुचारु रूप से संचालित करने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न माध्यमों से फैक्ट्री मालिकों को कोयला उपलब्ध कराया जाता है।

इसके तहत लिंकेज कोयले का आक्शन कराया जाता है, जिसमें मुख्य रूप से फैक्ट्री संचालकों को भाग लेने का अवसर मिलता है। इसी प्रकार झारखंड में जेएसएमडी के माध्यम से, उत्तर प्रदेश में यूपी माइनिंग तथा बिहार में बिहार माइनिंग के तहत फैक्ट्री संचालकों को निर्धारित आधार मूल्य पर कोयला उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। 

फैक्ट्री मालिकों के लिए विशेष योजना

इसके अलावे फैक्ट्री संचालन में कोयले की कमी न हो इसको लेकर फैक्ट्री मालिकों के लिए विशेष योजनाओं के तहत ट्रेंच-वन से ट्रेंच-10 तक आक्शन भी कराया गया है। कारोबारियों का कहना है कि इन योजनाओं का मूल उद्देश्य फैक्ट्रियों को कच्चा माल उपलब्ध कराना, उत्पादन बढ़ाना और रोजगार का सृजन करना है। लेकिन फैक्ट्री संचालक इन योजनाओं के तहत प्राप्त कोयले का निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप इस्तेमाल करने के बजाय खुले बाजार में बिक्री कर रहे हैं। 

इससे सरकार की उस मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसके तहत रियायती दर पर कोयला उपलब्ध कराकर उद्योगों को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने की पहल की जाती है। 

बड़े कारोबारी बाजार में कोयला बेच रहे

छोटे कारोबारियों का आरोप है कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर बड़े कारोबारी बाजार में कोयला बेच रहे हैं, जबकि छोटे कोयला कारोबारी के समक्ष जीविकोपार्जन की समस्या खड़ा हो रहा तो उनसे जुड़े मजदूर रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 

उनका कहना है कि यदि फैक्ट्री संचालन के लिए उपलब्ध कराए गए कोयले का निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप उपयोग हो तो इससे उत्पादन के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। कारोबारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय एजेंसियों अथवा सक्षम जांच एजेंसी से कराने की मांग की है। 

उनका कहना है कि योजनाओं के तहत आवंटित कोयले की मात्रा, उसके उठाव, उपयोग और बिक्री की जांच की जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। साथ ही यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि सरकार द्वारा उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित योजनाओं का लाभ वास्तव में निर्धारित उद्देश्य के लिए किया जा रहा है या नहीं।

विधानसभा में कई बार उठाया मुद्दा, नहीं हुई कोई सुनवाई : जेपी पटेल

झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री सह मांडू विधानसभा के पूर्व विधायक जयप्रकाश भाई पटेल ने कहा कि मैं भाजपा में रहते हुए कई बार विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया है। इसको लेकर राज्य व केंद्र सरकार से दर्जनों बार पत्राचार किया। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुआ क्योंकि इसमें बड़े बड़े उद्योगपति शामिल हैं। 

सीसीएल सीएमडी और सीआइएल के चेयरमैन से भी दर्जनों बार पत्राचार किया, लेकिन परिणाम शून्य रहा। सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर रोजगार का गला घटना अपराध है। जंगल का कोयला ही अवैध नहीं है, बल्कि उससे बडा अवैध कोयला का कारोबार फैक्ट्री मालिकों द्वारा किया जा रहा है। 

जो फैक्ट्री चलाने, रोजगार का सृजन करने, सरकारी राजस्व बढ़ाने आदि के नाम सरकारी योजनाओं का लाभ लेते तो जरूर हैं, लेकिन उसका उपयोग समाज या राज्य के लिए न करके व्यक्तिगत लाभ लिए कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें- रामगढ़: कुजू मंडी में बिहार-यूपी के रियायती कोयले की बिक्री का आरोप, 5 हजार का कोयला 9 हजार में बिकने का दावा