अजय कुमार चौधरी, सतबरवा : शिक्षा एक्सप्रेस के ट्रेन का दरवाजा नियत समय से खुलते हैं, मगर इसमें यात्री की जगह स्कूल ड्रेस में छात्र-छात्राएं प्रवेश करते है। सभी के कंधे पर बैग रहता है। इसमें किताब, कॉपी, कलम, पेंसिल इत्यादि रहता। कुछ समय के लिए समझना कठिन होता है कि इतने बच्चे ट्रेन से कहां जा रहे हैं। पर चंद सेकेंड के बाद पता चलता है कि यह ट्रेन नहीं बल्कि विद्यालय को ही ट्रेन का शक्ल दिया गया है। हम बात कर रहे है झारखंड प्रदेश के पलामू जिला अंतर्गत सतबरवा प्रखंड के राजकीयकृत मध्य विद्यालय कसियाडीह का।

यह आदर्श विद्यालय के रूप में दर्जा प्राप्त कर चुका है। छोटी-छोटी कोशिश भी बड़ा बदलाव ला सकता है ऐसा मानना है वरीय शिक्षक गो¨वद प्रसाद का। उन्होंने इसे चरितार्थ करने का भी भरपूर प्रयास किया है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक गो¨वद प्रसाद बताते हैं कि इस सरकारी विद्यालय के बच्चों को नया माहौल देने के लिए स्कूल का रंग रूप बदला गया है। यह स्कूल बाहर से ट्रेन के रूप में दिखाई पड़ता है। ऐसा लगता है की प्लेटफार्म में ट्रेन रुकी हुई है। इसमें बच्चे चढ़ रहे है। बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने, स्कूल आने व शिक्षा के प्रति आकर्षित करने के लिए स्कूल को ट्रेन का रुप दिया गया है। स्कूल की बाहरी दीवार को इंजन और बोगी के रूप में पें¨टग की गई है। केरल राज्य के एक विद्यालय को देख कर ट्रेन का रुप दिया गया है। जिससे बच्चे स्कूल के प्रति आकर्षित हों।

क्या कहना है प्रधानाध्यापक का

प्रधानाध्यापक गो¨वद प्रसाद बताते है कि दो वर्ष पूर्व में मैंने इस विद्यालय में पदभार संभाला था, उस वक्त मुझे 3 से 4 कुर्सी मिली थी और 35 से 40 बच्चे थे। जो नामांकन पहले था वह आज भी 1 से 8 तक में 280 छात्र-छात्रा बरकरार है। यह पें¨टग दो सप्ताह पूर्व ही केरल राज्य के तर्ज पर कराया गया है जिसका लागत 16 हजार रूपये है। यहां कुल पांच शिक्षक है जिसमें 4 अस्थाई व एक शिक्षक प्रतिनियोजित हैं। बताया कि इस विद्यालय के छात्रा सोनी कुमारी और मीना कुमारी पलामू के खेल टीम का प्रतिनिधित्व की है। हाल ही में खेलकूद प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने पर पलामू के उपायुक्त अमीत कुमार ने सोनी और मीना को छह मेडल दे कर सम्मानित किया है।

Posted By: Jagran

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