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एक महीने पहले मिली थी तरक्की, अब उठी अर्थी; पलामू के सूबेदार बुचून पाल को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

Published: Mon, 21 Sep 2026 09:39 AM (IST)

पलामू के जरही टोला निवासी सूबेदार बुचून पाल को नम आँखों से अंतिम विदाई दी गई। एक माह पहले पदोन्नति ...और पढ़ें

कोयल नदी तट पर सूबेदार बुचून पाल को दी अंतिम विदाई। जागरण

कोयल नदी तट पर सूबेदार बुचून पाल को दी अंतिम विदाई। जागरण

HighLights

  1. डगरा पिकेट में पदस्थापित सूबेदार बुचून पाल की गोली लगने से मौत।

  2. करीब एक माह पहले ही उन्हें सूबेदार पद पर पदोन्नति मिली थी।

संवाद सूत्र, उंटारी रोड (पलामू)। जोगा पंचायत के जरही टोला निवासी सूबेदार बुचून पाल की अंतिम यात्रा रविवार को बेहद गमगीन माहौल में निकली। जिस गांव में कुछ समय पहले उनकी पदोन्नति की खुशी मनाई गई थी, वहीं रविवार को उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए लोगों की आंखें नम थीं। स्थानीय कोयल नदी तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्वजन और शुभचिंतक पहुंचे। हर आंख नम थी और हर चेहरा अपनों को खोने का दर्द बयां कर रहा था।

सूबेदार बुचून पाल की शनिवार को गोली लगने से मौत हो गई थी। वह नौडीहा बाजार थाना क्षेत्र के डगरा पिकेट में पदस्थापित थे। मौत की खबर मिलते ही जोगा सहित आसपास के गांवों में शोक की लहर दौड़ गई। जिस बुचून पाल को लोग उनके सहज और मिलनसार व्यवहार के लिए जानते थे, उनके अचानक चले जाने की खबर पर लोगों को विश्वास करना मुश्किल हो रहा था।

रविवार को अंतिम संस्कार के दौरान ग्रामीणों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वजनों और ग्रामीणों ने बताया कि बुचून पाल मिलनसार और मृदुभाषी स्वभाव के थे। करीब एक माह पहले ही उन्हें सूबेदार पद पर पदोन्नति मिली थी। पदोन्नति से परिवार और गांव में खुशी का माहौल था।

परिवार ने जिस पदोन्नति को बुचून पाल की नई जिम्मेदारी और उपलब्धि के रूप में देखा था, कुछ ही दिनों बाद वही खुशी मातम में बदल गई। किसी को अंदाजा नहीं था कि खुशियों से भरा यह समय इतनी जल्दी अपनों को रुला जाएगा।

बुचून पाल चार भाइयों में दूसरे स्थान पर थे। उनके बड़े भाई सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, जबकि दोनों छोटे भाई पुलिस विभाग में कार्यरत हैं। पुलिस सेवा से जुड़े इस परिवार ने अपना एक सदस्य खो दिया। परिवार ने एक ऐसे सदस्य को खो दिया, जो अपने सहज व्यवहार और मिलनसार स्वभाव के कारण सभी के बीच लोकप्रिय थे।

कोयल नदी तट पर अंतिम संस्कार के साथ बुचून पाल की जीवन यात्रा थम गई। पीछे रह गईं उनकी यादें, उनका सहज व्यवहार और उनसे जुड़ी अनगिनत बातें, जिन्हें परिवार, पुलिसकर्मी साथी और गांव के लोग लंबे समय तक अपने बीच संजोए रखेंगे। 

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