पलामू बना गांजा तस्करी का डंपिंग प्वाइंट! दो महीने में 889 किलो बरामद, ओडिशा-बिहार-यूपी तक फैला नेटवर्क
पलामू अब गांजा तस्करी का ट्रांजिट रूट नहीं, बल्कि डंपिंग प्वाइंट बन गया है, जहां ओडिशा से आने वाला गांजा ...और पढ़ें

ऑपरेशन प्रहार में दो माह में 889 किलो गांजा जब्त। जागरण
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ऑपरेशन प्रहार में दो माह में 889 किलो गांजा जब्त।
पलामू गांजे का डंपिंग प्वाइंट बना, ट्रांजिट रूट बदला।
जागरण संवाददाता, मेदिनीनगर (पलामू)। नशे के सौदागरों ने पलामू को ट्रांजिट रूट से डंपिंग प्वाइंट में बदल दिया है। ओडिशा से गांजे की खेप पलामू पहुंच रही है। यहां इसे ठिकानों पर छिपाने के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश भेजे जाने का खुलासा पुलिस की हालिया कार्रवाई में हुआ है।
ऑपरेशन प्रहार के तहत दो महीनों में तीन बड़ी कार्रवाइयों में 889 किलो गांजा बरामद किया गया है। पांच तस्करों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े सप्लायर और रिसीवर तक पहुंचने में जुटी है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में ओडिशा, बिहार और उत्तर प्रदेश से जुड़े कई लोगों के नाम सामने आए हैं। इनकी भूमिका और नेटवर्क से जुड़े कनेक्शन का सत्यापन कराया जा रहा है। पुलिस को आशंका है कि गिरफ्तार आरोपित मुख्य रूप से कुरियर के रूप में काम कर रहे थे।
डीएसपी स्तर की स्पेशल टीम करेगी छापामारी
इंटरस्टेट नेटवर्क की पूरी चेन तक पहुंचने के लिए पलामू पुलिस ने डीएसपी स्तर के अधिकारियों को शामिल करते हुए विशेष छापामारी दल गठित किया है। टीम बिहार और ओडिशा समेत अन्य संभावित ठिकानों पर कार्रवाई करेगी। पहले चरण में गिरफ्तार आरोपितों से मिले नामों का सत्यापन किया जा रहा है। इसके बाद सप्लायर, रिसीवर और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ट्रांजिट रूट से डंपिंग प्वाइंट तक बदला तस्करी का तरीका
पुलिस की पुरानी कार्रवाई और हालिया बरामदगी की तुलना से गांजा तस्करी के पैटर्न में बदलाव के संकेत मिले हैं। वर्ष 2020-21 के दौरान ओडिशा नेटवर्क पलामू का इस्तेमाल मुख्य रूप से ट्रांजिट रूट के रूप में करता था। गांजे की खेप पलामू के रास्ते आगे भेजी जाती थी और बरामदगी अक्सर नेशनल हाईवे या स्टेट हाईवे पर होती थी।
वर्ष 2024-25 के बाद ऐसी खेप बरामद होने लगी है, जिसे पहले पलामू में किसी स्थान पर छिपाकर रखा गया था। पुलिस इसी बदलाव को पलामू के डंपिंग प्वाइंट के तौर पर इस्तेमाल किए जाने से जोड़कर देख रही है।
भौगोलिक स्थिति का उठा रहे फायदा
पलामू की सीमा बिहार से करीब 80 से 90 किलोमीटर तक जुड़ी है। जिला उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के भी करीब है। इसके अलावा यहां से नेशनल हाईवे और रेल मार्ग गुजरते हैं। पुलिस के अनुसार, तस्कर सड़क और रेल नेटवर्क का इस्तेमाल गांजे की खेप को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में कर रहे हैं।
तीन बड़ी बरामदगी में 889 किलो गांजा
1.26 जुलाई, हुसैनाबाद : थाना क्षेत्र से करीब 325 किलो गांजा बरामद किया गया। इसकी कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये बताई गई। मामले में एक तस्कर गिरफ्तार हुआ।
2.26 अगस्त, सतबरवा : थाना क्षेत्र से 121 किलो गांजा बरामद हुआ। एक ग्राहक सेवा केंद्र संचालक को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, खेप ओडिशा के संबलपुर से आई थी और इसे बिहार भेजा जाना था।
3.29 अगस्त, नौडीहा बाजार : थाना क्षेत्र से 443 किलो गांजा बरामद किया गया। दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, गांजा छिपाकर रखा गया था और इसे बिहार में सप्लाई किया जाना था। बरामद गांजे की कीमत करीब ढाई करोड़ रुपये बताई गई।
ऑपरेशन प्रहार के तहत करीब 900 किलो गांजा बरामद किया गया है और पांच तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। मामलों के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज ओडिशा, बिहार और उत्तर प्रदेश से जुड़े हैं। गांजा कहां से आया और किसे सप्लाई किया जाना था, इसकी पूरी चेन का पता लगाने के लिए विशेष टीम गठित की गई है। टीम बिहार और ओडिशा में भी छापेमारी करेगी और नेटवर्क में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-कपिल चौधरी, एसपी, पलामू
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