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चंदवा से शुरू हुआ सियासी सफर, बिहार विधानसभा से लोकसभा तक पहुंचे ब्रज मोहन राम, अब बने ओडिशा के राज्यपाल

By SachidanandEdited By: Mritunjay Pathak
Published: Mon, 12 Oct 2026 10:03 PM (IST)

Braj Mohan Ram: पलामू के चंदवा से अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले ब्रज मोहन राम अब ओडिशा के राज्यपाल ...और पढ़ें

ओडिशा के नव नियुक्त राज्यपाल ब्रज मोहन राम। (फाइल फोटो)

ओडिशा के नव नियुक्त राज्यपाल ब्रज मोहन राम। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. ब्रज मोहन राम ओडिशा के नए राज्यपाल नियुक्त।

  2. पलामू के चंदवा से शुरू हुआ राजनीतिक सफर।

  3. बिहार विधानसभा और तीन बार लोकसभा सांसद रहे।

जागरण संवाददाता, मेदिनीनगर (पलामू)। झारखंड के पलामू जिले के चंदवा (वर्तमान में लातेहार जिला) से निकलकर बिहार विधानसभा और लोकसभा तक पहुंचने वाले ब्रज मोहन राम अब ओडिशा के राज्यपाल बन गए हैं।

भाजपा नेता ब्रज मोहन राम का राजनीतिक सफर ग्रामीण परिवेश से शुरू होकर राष्ट्रीय राजनीति और अब संवैधानिक पद तक पहुंचा है। लातेहार विधानसभा क्षेत्र से बिहार विधानसभा के सदस्य रहने के बाद उन्होंने लोकसभा में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

वह 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा के सदस्य रहे। संसद में कोयला, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन और अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण से संबंधित समितियों में उनकी भागीदारी रही। ओडिशा के राज्यपाल के रूप में उनकी नई भूमिका उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

चंदवा में जन्म, लोहरदगा में शिक्षा

ब्रज मोहन राम का जन्म 1 जनवरी 1958 को तत्कालीन बिहार के पलामू जिले के चंदवा में हुआ था। उनके पिता का नाम अर्जुन राम बैठा और माता का नाम चैती देवी था।

ग्रामीण परिवेश से आने वाले ब्रज मोहन राम का पेशा कृषि रहा है। उन्होंने बीएस कॉलेज, लोहरदगा से बीए की पढ़ाई की। पांच मार्च 1979 को उनका विवाह लीला देवी से हुआ। उनके तीन बेटे हैं।

चंदवा से शुरू हुआ उनका सफर उस दौर से जुड़ा है, जब झारखंड अलग राज्य नहीं बना था और पलामू बिहार का हिस्सा था। इसी क्षेत्र से निकलकर उन्होंने राज्य की राजनीति में जगह बनाई और फिर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचे।

लातेहार विधानसभा से राजनीतिक शुरुआत

ब्रज मोहन राम के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बिहार विधानसभा रहा। वह 1991 से 1995 तक लातेहार विधानसभा क्षेत्र से बिहार विधानसभा के सदस्य रहे।

इस दौरान उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी भूमिका निभाई। इसके बाद उनका राजनीतिक सफर संसद तक पहुंचा और वह राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हुए।

1996 से 2004 तक रहे सांसद

वर्ष 1996 में ब्रज मोहन राम 11वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। इसके बाद 1998 में 12वीं लोकसभा और 1999 में 13वीं लोकसभा के लिए दोबारा चुने गए। लगातार तीन लोकसभाओं में प्रतिनिधित्व ने उन्हें संसदीय कामकाज का अनुभव दिया।

संसद में उनकी भूमिका सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं रही। उन्होंने विभिन्न संसदीय समितियों में भी जिम्मेदारियां निभाईं।

इन समितियों के माध्यम से उन्हें ऊर्जा, कोयला, परिवहन, पर्यटन, गृह मामलों और सामाजिक कल्याण जैसे विषयों से जुड़े मामलों पर काम करने का अवसर मिला।

संसदीय समितियों में निभाईं जिम्मेदारियां

ब्रज मोहन राम वर्ष 1996-97 में गृह मामलों की समिति और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति के सदस्य रहे। वर्ष 1996-98 के दौरान वह इस्पात एवं खान मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति तथा रेल मंत्रालय की पूर्वी रेलवे से संबंधित अनौपचारिक समिति से जुड़े रहे।

वर्ष 1998-99 में उन्होंने ऊर्जा समिति और उसकी विद्युत उपसमिति-I के सदस्य के रूप में काम किया। वर्ष 1999 में वह सदन की बैठकों से सदस्यों की अनुपस्थिति संबंधी समिति के सदस्य रहे। कोयला मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति में भी उनकी भागीदारी रही।

वर्ष 2000 से 2004 के बीच वह परिवहन एवं पर्यटन समिति के सदस्य रहे। रेल मंत्रालय की सलाहकार समिति में स्थायी विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में भी उनका नाम दर्ज है।

अनुसूचित जाति समुदाय के प्रतिनिधित्व से भी जुड़ा रहा सफर

ब्रज मोहन राम की राजनीतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण पक्ष अनुसूचित जाति समुदाय का प्रतिनिधित्व भी रहा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वर्ष 1996 से 1998 तक उन्होंने रांची में वनांचल प्रदेश अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई।

संसद में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति से उनका जुड़ाव भी उनके राजनीतिक जीवन का अहम हिस्सा रहा।

राज्यपाल पद के साथ नई जिम्मेदारी

ओडिशा के राज्यपाल के रूप में ब्रज मोहन राम की भूमिका अब विधायी राजनीति से अलग संवैधानिक दायित्वों से जुड़ती है। राज्यपाल का पद राज्य के संवैधानिक प्रमुख का होता है।

इस भूमिका में संविधान के प्रावधानों के अनुरूप काम करना और राज्य की संवैधानिक व्यवस्था के संचालन में निर्धारित जिम्मेदारियां निभाना महत्वपूर्ण होता है।

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उनकी इस नई भूमिका के कारण चंदवा, पलामू और झारखंड से जुड़े उनके राजनीतिक सफर की चर्चा स्वाभाविक है। बिहार विधानसभा से लोकसभा तक का अनुभव रखने वाले ब्रज मोहन राम के सार्वजनिक जीवन में यह एक नया अध्याय है।

राजनीतिक सफर की प्रमुख तिथियां

  • 1 जनवरी 1958: चंदवा में जन्म।

  • 1991–1995: लातेहार विधानसभा क्षेत्र से बिहार विधानसभा के सदस्य रहे।

  • 1996: 11वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।

  • 1996–1998: वनांचल प्रदेश अनुसूचित जाति मोर्चा, रांची के अध्यक्ष रहे।

  • 1998: 12वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।

  • 1999: 13वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।

  • 2000–2004: परिवहन एवं पर्यटन समिति के सदस्य रहे।

  • नई जिम्मेदारी: ओडिशा के राज्यपाल।