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पाकुड़ में खदान के साए में आंगनबाड़ी, जान जोखिम में डालकर ककहरा सीख रहे मासूम

Published: Sun, 19 Jul 2026 07:00 AM (IST)

महेशपुर के चांदपुर गांव में एक आंगनबाड़ी केंद्र पत्थर खदान के बिल्कुल पास संचालित हो रहा है, जिससे मासूम बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

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HighLights

  1. आंगनबाड़ी केंद्र पत्थर खदान के समीप संचालित हो रहा है।

  2. ब्लास्टिंग, धूल, भारी वाहनों से बच्चों को खतरा।

  3. ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरण की मांग की।

रंजन कुमार गुप्ता, महेशपुर (पाकुड़)। सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से कुपोषण मुक्त भारत, बच्चों के स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा को सुदृढ़ बनाने का दावा कर रही है, लेकिन महेशपुर प्रखंड के रद्दीपुर ओपी क्षेत्र अंतर्गत श्रीरामगढ़िया पंचायत के चांदपुर गांव का आंगनबाड़ी केंद्र इन दावों की हकीकत बयां कर रहा है।

यहां केंद्र एक बड़े पत्थर खदान के बिल्कुल समीप संचालित हो रहा है, जहां मासूम बच्चों को हर दिन जान जोखिम में डालकर पोषण और शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है। खदान में लगातार होने वाली ब्लास्टिंग, उड़ती धूल और भारी वाहनों की आवाजाही से बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

डर के साए में चल रहा केंद्र

ग्रामीणों के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र से महज 10 कदम की दूरी पर पत्थर खदान संचालित है। ब्लास्टिंग और मशीनों की तेज आवाज के कारण केंद्र की सेविका भी भय के माहौल में काम कर रही है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए वह अधिकांश दिनों में अपने घर से ही केंद्र का संचालन कर रही है, जबकि मूल केंद्र भवन कभी-कभार ही खोला जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दिनभर उड़ने वाली पत्थर की धूल से केंद्र परिसर और बच्चों को मिलने वाला पोषण आहार भी प्रभावित होता है। लंबे समय तक ऐसी धूल के संपर्क में रहने से बच्चों में सांस संबंधी बीमारियां, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ रहा है।

डंपरों की आवाजाही से दुर्घटना की आशंका

केंद्र के समीप से लगातार ओवरलोड डंपरों का आवागमन होता है। तेज रफ्तार वाहनों और उड़ती धूल के कारण बच्चों के केंद्र आने-जाने में हर समय हादसे का डर बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में न तो सुरक्षा घेराबंदी है और न ही धूल नियंत्रण की कोई व्यवस्था।

ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए आंगनबाड़ी केंद्र को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। यदि यह संभव नहीं हो तो केंद्र के चारों ओर सुरक्षा दीवार, धूल नियंत्रण और भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि मासूम बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

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