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सड़क के अभाव में खटिया बनी एंबुलेंस: पाकुड़ के मासधारी गांव में गर्भवती महिला को 2 KM कंधे पर ढोया

Published: Thu, 05 Nov 2026 06:50 PM (IST)

पाकुड़ के मासधारी गांव में सड़क न होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी हो रही है। हाल ही में एक ...और पढ़ें

कंधे पर ढोकर ले जाते परिजन। (जागरण)

कंधे पर ढोकर ले जाते परिजन। (जागरण)

HighLights

  1. मासधारी गांव में सड़क अभाव, एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती।

  2. गर्भवती महिला को खटिया पर लादकर 2 किमी मुख्य सड़क तक पहुंचाया।

  3. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गांव तक सड़क निर्माण की मांग की।

शंकर प्रमाणिक, लिट्टीपाड़ा (पाकुड़)। विकास और आधुनिक सुविधाओं के दावों के बीच मासधारी गांव के ग्रामीणों की जिंदगी आज भी सड़क के इंतजार में अटकी है।

गांव में किसी की तबीयत बिगड़ जाए या कोई आपात स्थिति आ जाए तो एंबुलेंस और चारपहिया वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते।

ऐसे में मरीज को खटिया पर लिटाकर कंधों के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाना ग्रामीणों की मजबूरी बन गई है। बुधवार को भी एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर स्वजनों और ग्रामीणों ने इसी तरह करीब दो किलोमीटर तक खटिया पर ढोकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया।

इसके बाद उसे अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई। यह दृश्य केवल एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि पूरे गांव की बदहाली और बुनियादी सुविधाओं के अभाव की तस्वीर है।

जानकारी के अनुसार, करमाटार पंचायत के मासधारी गांव निवासी 25 वर्षीय बागी पहाड़िन को बुधवार को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। स्वजनों ने तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाने की तैयारी की, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस वहां नहीं पहुंच सकी।

समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की चिंता के बीच ग्रामीणों ने खटिया का सहारा लिया। महिला को उस पर लिटाया और कंधों पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले गए। इसके बाद उसे अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई।

हर आपात स्थिति में खटिया ही सहारा

ग्राम प्रधान बैदा पहाड़िया ने बताया कि गांव से मुख्य सड़क की दूरी लगभग दो किलोमीटर है। सड़क नहीं होने के कारण गांव में किसी की तबीयत खराब होने, दुर्घटना होने या प्रसव जैसी आपात स्थिति में मरीज को खटिया पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।

यह समस्या किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि गांव के प्रत्येक परिवार की है। ग्रामीणों को हर बार इसी कठिनाई से गुजरना पड़ता है।

गर्भवती और बुजुर्गों की बढ़ जाती है परेशानी

ग्रामीणों के अनुसार, सड़क के अभाव में सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर रूप से बीमार लोगों को होती है।

जिस समय मरीज को तत्काल चिकित्सकीय सहायता की जरूरत होती है, उसी समय उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है।

गर्भवती महिला के मामले में यह परेशानी और भी गंभीर हो जाती है। गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाना आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पर भी सवाल खड़ा करता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से गांवों को सड़क से जोड़ने और स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन मासधारी गांव की स्थिति इन दावों से अलग तस्वीर पेश करती है।

आज भी यहां के लोगों को इलाज के लिए मरीजों को खटिया पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से गांव तक सड़क निर्माण कराने की मांग की है।

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