संवाद सूत्र, हिरणपुर (पाकुड़) : आज सरकार के बाद सर्वाधिक जमीन ईसाई मिशनरियों के पास है। आदिवासी समाज को लालच देकर मिशनरियां न सिर्फ उनका धर्म बदल रही है, बल्कि उनकी जमीन भी कब्जा रही है। यह आरोप जनजाति सुरक्षा मंच ने लगाया है। अपनी मांगों के समर्थन में शुक्रवार को हिरणपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में मंच ने धरना दिया। मंच के सदस्यों ने राज्यपाल के नाम प्रखंड विकास पदाधिकारी गिरिजा शंकर महतो को ज्ञापन सौंपा।

धरना का नेतृत्व कर रहे मंच के जिला संयोजक सुलेमान मुर्मू ने कहा कि झारखंड में अनुसूचित जनजाति के संवैधानिक अधिकारों की अवहेलना की जा रही है। सूबे के 118 प्रखंड अधिसूचित क्षेत्र है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में धर्मातरित जनजाति समुदाय के सदस्य जो जनजाति सनातन परंपरा, रीति-रिवाज, पूजा अनुष्ठान को त्याग चुके हैं या विवाह विरासत के प्राथमिक सामाजिक नियमों का पालन नहीं करते हैं, वैसे लोगों को अनुसूचित जनजाति का संवैधानिक लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। कहा कि आदिवासी समाज में मांझी, नाइकी आदि धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं। उन्हें जीवन-यापन के लिए समाज की ओर से भूमि उपलब्ध कराई गई थी। अपना धर्म बदलने के बाद भी वह उस जमीन को अपने कब्जे में रखे हुए है। अनुसूचित जनजाति की युवतियां गैर जनजाति से विवाह कर अनुसूचित जनजाति का लाभ ले रही है।

जिला संयोजक ने बताया कि एसपीटी व सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर अनुसूचित जनजातियों की जमीन गैर जनजातियों के दलाल व दबंग लोग हड़पे हुए हैं। आज सरकार के बाद सबसे अधिक जमीन ईसाई मिशनरी के पास है, इसकी जांच जरूरी है। इस मौके प्रधान कालिदास किस्कु, मंडल मुर्मू, सुभाष किस्कु, जीवन सोरेन आदि उपस्थित थे।

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