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36 लाख से अधिक के बजट से सजेगा अमड़ापाड़ा का दुर्गापूजा उत्सव, 15 फीट की प्रतिमा और वाराणसी की गंगा आरती होगी खास आकर्षण

Published: Sun, 11 Oct 2026 02:35 PM (IST)

पाकुड़ के अमड़ापाड़ा में 102वीं दुर्गा पूजा 36 लाख से अधिक के बजट के साथ भव्य रूप से मनाई जा ...और पढ़ें

अमड़ापाड़ा की दुर्गापूजा एकता और सामूहिक आस्था की ऐसी परंपरा है, जो दशकों से कायम है।

अमड़ापाड़ा की दुर्गापूजा एकता और सामूहिक आस्था की ऐसी परंपरा है, जो दशकों से कायम है।

HighLights

  1. 102वीं दुर्गा पूजा 36 लाख से अधिक के बजट में।

  2. 15 फीट ऊंची मां दुर्गा की मनमोहक प्रतिमा।

  3. चंदननगर की विद्युत सज्जा और वाराणसी की गंगा आरती।

संस, पाकुड़। एक गांव, एक मंडप और मां दुर्गा की आराधना में एकजुट होते ग्रामीण। अमड़ापाड़ा की दुर्गापूजा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक आस्था की ऐसी मिसाल है, जो दशकों से अटूट है। 
 
बांसलोई नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक वैष्णवी दुर्गा मंदिर परिसर में इस बार पूजा को भव्य स्वरूप देने की जोरदार तैयारी चल रही है। वर्ष 1924 में स्थापित सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति इस वर्ष अपने 102वें पूजा समारोह के भव्य आयोजन की तैयारियों में जुटी है।
 
इस बार के ऐतिहासिक आयोजन के लिए 36 लाख रुपये से अधिक का विशाल बजट निर्धारित किया गया है। श्रद्धालुओं के लिए 5500 वर्गफुट में मुख्य पंडाल, 15 फीट ऊंची मां दुर्गा की मनमोहक प्रतिमा, चंदननगर की आकर्षक विद्युत सज्जा और वाराणसी की तर्ज पर गंगा आरती विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। 
 
11 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:36 से दोपहर 12:24 बजे के बीच कलश स्थापना के साथ नवरात्र का विधिवत शुभारंभ होगा। पूजा की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। 
 
मंदिर परिसर में करीब 5500 वर्गफुट का भव्य मुख्य पंडाल आकार ले रहा है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए शिव-पार्वती मंदिर परिसर में 3500 वर्गफुट का अतिरिक्त पंडाल भी निर्मित किया जा रहा है, जिसे बनाने में 25 कुशल कारीगर दिन-रात लगे हैं। 
 
पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध मूर्तिकार करीब तीन लाख रुपये की लागत से मां दुर्गा की 15 फीट ऊंची प्रतिमा गढ़ रहे हैं। वहीं, चंदननगर की स्पेशल लाइट डिजाइनर टीम लगभग 18 लाख रुपये की लागत से मुख्य मार्ग पर रंग-बिरंगे तोरण द्वार और आकर्षक लाइटिंग कर रही है।
 
इस बार महाअष्टमी की शाम बेहद खास होगी, जब वाराणसी से आ रहे पंडितों की विशेष टीम द्वारा भव्य गंगा आरती संपन्न कराई जाएगी। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी दौर चलेगा। 
 
16 अक्टूबर को देवी बोधन के उपरांत जूनियर ग्रुप डांस प्रतियोगिता तथा 21 अक्टूबर को सीनियर ग्रुप डांस प्रतियोगिता और सम्मान समारोह आयोजित होगा। नवमी की रात आयोजित होने वाला डांडिया नृत्य भी श्रद्धालुओं को लुभाएगा।
 
सुरक्षा और व्यवस्था के दृष्टिकोण से पूरे पूजा परिसर में 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। अग्निशमन यंत्रों के साथ भीड़ प्रबंधन की पुख्ता व्यवस्था की गई है।
 
पूजा समिति के अध्यक्ष संजीव कुमार उर्फ बबलू भगत ने बताया कि पूरे गांव का एक ही मंडप में एकजुट होना इस पूजा की सबसे बड़ी खासियत है और 102वें वर्ष के इस आयोजन को यादगार बनाने में सभी ग्रामीण व सदस्य दिन-रात जुटे हुए हैं।