पाकुड़: जिले में 2005 से स्वास्थ्य विभाग की ओर से यक्ष्मा (टीबी) उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत अबतक 11678 टीबी मरीजों को रोगमुक्त घोषित किया जा चुका है। इस कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर यक्ष्मा मरीजों को भारत सरकार अब आर्थिक लाभ दे रही है। पाकुड़ जिला में भी एक अप्रैल से निपेक्ष पोषण योजना शुरू की है। इसके तहत यक्ष्मा मरीजों को पौष्टिक आहार के एवज में प्रतिमाह पांच सौ रुपये दिया जाता है। यह राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाता में भेजी जाती है। इस योजना का लाभ जिले के 665 यक्ष्मा मरीजों को मिल रहा है।

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15 हजार से अधिक मरीजों की बलगम जांच:

यक्ष्मा नियंत्रण विभाग की ओर से इसके मरीजों की पहचान करने के लिए बलगम जांच कार्यक्रम चलाया जाता है। इसके तहत वर्ष 2005 से अब तक 15,284 लोगों के बलगम की जांच की गई। इसमें से 11,678 लोग यक्ष्मा से पीड़ित पाए गए। डाट्स कार्यक्रम के तहत यक्ष्मा पीड़ित इन मरीजों में से किसी को 6 माह या 8 माह तो किसी को दो साल तक विभागीय कर्मियों द्वारा प्रतिदिन नि:शुल्क दवा का सेवन कराया गया। उसके बाद उन्हें रोगमुक्त घोषित किया गया। सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर सदानंद ओझा ने कहा कि जुलाई माह में जिले के सभी छह प्रखंडों में कालाजार के साथ-साथ टीबी मरीज खोज अभियान चलाया गया। करीब सात सौ लोगों को चिह्नित कर उनके बलगम की जांच की गई। इसमें से 70 यक्ष्मा के मरीज पाये गए। इन नए मरीजों को भी निक्षेप पोषण योजना का लाभ मिलेगा।

वर्जन ::

भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य है। जिला के स्वास्थ्य विभाग भी यहां इस लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास कर रही है। इसमें हम सफल होंगे।

डॉ. बीके ¨सह, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी, पाकुड़

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