पाकुड़ : नदी कटाव को रोकने व जल संरक्षण के लिए सरकार ने कमर कस ली है। झारखंड सरकार के निर्देश पर वन विभाग जिले से होकर गुजरने वाली बांसलोई नदी के तट पर पौधरोपण करेगी। तैयारी पूरी हो चुकी है। बारिश होने के साथ ही पौधरोपण का कार्य प्रारंभ हो जाएगा। अधिकतर काठ व फलदार प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे। पौधों की सुरक्षा के लिए भी वन विभाग मुकम्मल व्यवस्था करेगी। फिलहाल चिह्नित स्थानों पर पीलर गाड़ कर कंटीला तार से घेराव कर दिया गया है। करीब 90 लाख की लागत से यह परियोजना पूर्ण होगी।

नमामि गंगे योजना के तहत महेशपुर व अमड़ापाड़ा प्रखंड के बीच से गुजरने वाली बांसलोई नदी के दोनों छोर पर करीब 10 किलोमीटर तक पौधरोपण का कार्य होगा। बांसलोई नदी के कैराछत्तर, बलियाडांगा, शहरी, डुमरिया, बासकेंद्री तट पर पौधरोपण किए जायेंगे। तट पर जामुन, नीम, करंज, आम, बरगद, पीपल, सोनाछाल (बानाहाथा), गिरिश, सिमल सहित अन्य प्रजाति के पौधे लगाए जायेंगे। वन विभाग के अनुसार नदी का कटाव को रोकने के लिए सरकार ने यह पहल शुरु की है। नदी कटाव रुकने के बाद स्वत: नदी का जल संरक्षण भी होगा। बांसलोई नदी के दोनों छोर पर पौधरोपण के बाद नदी की सुंदरता बढ़ेगी। पशु, पक्षी को भी राहत मिलेगी। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार नदी किनारे पौधरोपण आम लोगों को भी काफी फायदे होंगे।

पौधों की सुरक्षा के लिए बनेंगे 100 ब्लॉक :

पौधरोपण के पूर्व बांसलोई नदी के तट पर 100 ब्लॉक बनाए जायेंगे। ब्लॉक को पीलर व कंटीला तार से घेरा जाएगा। ताकि पौधे सुरक्षित रह सके। एक ब्लॉक में 300 पौधे लगाए जाएंगे। पौधा बड़ा होने के बाद उसकी देखरेख के लिए वन विभाग पशु रक्षक की बहाली करेंगे। चार वर्षो तक पौधों की देखरेख होगी। पौधा जब बड़ा हो जाएगा तब नदी का कटाव आसानी से रुकेगा।

पौधरोपण के लिए भेजा गया था प्रस्ताव:

वन विभाग बांसलोई सहित तोड़ाई व तीनजोड़िया (कुपा) नदी के तट पर पौधरोपण के लिए प्रस्ताव भेजा था। सरकार ने बांसलोई नदी के तट पर पौधरोपण की स्वीकृति दी है। हालांकि जिले से होकर गुजरने वाली तोड़ाई नदी भी किसानों व आम जनों के लिए काफी उपयोगी है। तोड़ाई नदी का कटाव भी तेज गति से हो रही है बरसात के बाद नदी का दृश्य ही कुछ अलग हो जाता है। जहां-तहां मिट्टी कटाव से नदी की खूबसूरती बिगड़ जाती है। इस नदी के किनारे भी पौधरोपण आवश्यक है।

बारिश के इंतजार में विभाग :

वन विभाग के अनुसार सरकारी की ओर से फंड प्राप्त हो चुकी है। चिन्हित स्थलों पर ब्लॉक का घेराबंदी कार्य भी शुरु चुका है। परंतु नदी के तट पर मिट्टी में नमी नहीं होने के कारण पौधरोपण कार्य शुरु नहीं हो सका है। वन विभाग के पास आवश्यकतानुसार पौधे भी उपलब्ध हैं। वन विभाग बारिश के इंतजार में है। विभागीय पदाधिकारियों के अनुसार बारिश होते ही तट पर पौधरोपण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। पौधरोपण के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है।

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वर्जन

नमामि गंगे योजना के तहत बांसलोई नदी के तट पर पौधरोपण होगा। पौधरोपण का उद्देश्य नदी कटाव को रोकना है। वर्षा होते ही पौधरोपण का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।

अनिल कुमार सिंह, वन क्षेत्र पदाधिकारी, पाकुड़

Posted By: Jagran

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