12 वेंटिलेटर समेत ICU के उपकरण, फिर भी सुविधा बंद; लोहरदगा में गंभीर मरीजों को रिम्स भेजने की मजबूरी
लोहरदगा सदर अस्पताल में कोविड काल में बना आईसीयू निष्क्रिय पड़ा है, जिससे गंभीर मरीजों को रांची के रिम्स रेफर ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।
HighLights
कोविड काल में बना आईसीयू अब निष्क्रिय पड़ा है।
आधा दर्जन वेंटिलेटर और अन्य मशीनें बेकार हो रही हैं।
विक्रम चौहान, लोहरदगा। सदर अस्पताल में गंभीर और अति गंभीर मरीजों के बेहतर इलाज की उम्मीद अब भी अधूरी है। कोविड काल के दौरान अस्पताल में आईसीयू की सुविधा शुरू करने के उद्देश्य से एक कमरे में आवश्यक उपकरण लगाए गए थे, लेकिन नियमित संचालन नहीं होने के कारण अब ये मशीनें धीरे-धीरे बेकार होती जा रही हैं।
स्थिति यह है कि आईसीयू कक्ष में ताला लटका रहता है। अस्पताल में गंभीर मरीजों को रखने और तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की समुचित व्यवस्था नहीं होने से उन्हें रांची के रिम्स में रेफर करना पड़ता है। सदर अस्पताल के ऑउटडोर विभाग में प्रतिदिन करीब पांच से छह सौ मरीजों का इलाज किया जाता है। वहीं इंडोर में औसतन एक सौ मरीज भर्ती रहते हैं।
अस्पताल से प्रतिदिन औसतन छह गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए रेफर किया जाता है। इनमें क्रिटिकल स्थिति वाले मरीज भी शामिल होते हैं। ऐसे मरीजों के लिए अस्पताल में निगरानी, जीवनरक्षक उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सुविधा की आवश्यकता होती है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में इसकी कमी बनी हुई है।
12 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे
कोविड काल के दौरान सदर अस्पताल को 12 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे। इनमें से लगभग आधे वेंटिलेटर बाद में वापस ले लिए गए। अस्पताल में उपलब्ध वेंटिलेटर, हृदय संबंधी निगरानी उपकरण और अन्य जरूरी मशीनों का समुचित उपयोग नहीं हो पाने के कारण उनके खराब होने की आशंका बढ़ रही है। महंगे और अत्याधुनिक उपकरणों के बावजूद उनका उपयोग नहीं होना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
केवल मशीनें ही पर्याप्त नहीं
आईसीयू के बेहतर संचालन के लिए केवल मशीनें ही पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए गंभीर रोगों के उपचार में दक्ष विशेषज्ञ चिकित्सक, फिजिशियन, प्रशिक्षित नर्सिंगकर्मी और क्रिटिकल केयर तकनीशियन की आवश्यकता होती है।
सदर अस्पताल में वर्तमान में न तो क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ की नियमित सुविधा उपलब्ध है और न ही आईसीयू संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी कर्मचारियों की पर्याप्त व्यवस्था है। विशेषज्ञ चिकित्सक और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी के कारण उपलब्ध संसाधनों का भी अपेक्षित उपयोग नहीं हो पा रहा है।
लोहरदगा में एक बेहतर आइसीयू की व्यवस्था तो होनी ही चाहिए। यहां की प्रमुख आवश्यकता में से एक है। कई बार उन लोगों ने इस पर स्वास्थ्य विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया है। इसके बाद भी इस पर कोई पहल नहीं हुई है।
-सजल कुमार, एचआर हेड, इमरजेंसी केयर
लोहरदगा सदर अस्पताल में आइसीयू नहीं होने से मरीज को रेफर करने की मजबूरी होती है। विशेष तौर पर हार्ट अटैक और दूसरे गंभीर मामलों में मरीज को रांची ले जाने की मजबूरी होती है। इस आवश्यकता पर ध्यान देना होगा।
-प्रतिक प्रकाश मोनी, पूर्व वार्ड पार्षद
अस्पताल में आईसीयू की आवश्यकता है : डीएस
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शंकर प्रसाद ने कहा कि अस्पताल में आईसीयू की आवश्यकता है, लेकिन जगह और संसाधनों की कमी इसके संचालन में बड़ी बाधा है। यदि आईसीयू की सुविधा बेहतर तरीके से विकसित की जाए तो गंभीर मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है।
