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चतरा: अब कौलेश्वरी पर्वत में पूजा के फूल लेकर आने की जरूरत नहीं, तलहटी में विकसित होगी सुगंधित फूलों की बगिया

Published: Wed, 23 Sep 2026 03:32 PM (IST)

कौलेश्वरी पर्वत की तलहटी में सुगंधित फूलों की बगिया विकसित की जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को पूजा के लिए स्थानीय फूल ...और पढ़ें

कौलेश्वरी पर्वत तलहटी में सुगंधित फूलों की बगिया विकसित होगी।

कौलेश्वरी पर्वत तलहटी में सुगंधित फूलों की बगिया विकसित होगी।

HighLights

  1. कौलेश्वरी पर्वत तलहटी में सुगंधित फूलों की बगिया विकसित होगी।

  2. स्थानीय ग्रामीणों को फूलों की खेती से नया रोजगार मिलेगा।

जुलकर नैन, चतरा। प्रसिद्ध कौलेश्वरी पर्वत पर आने वाले श्रद्धालुओं को अब पूजा-अर्चना के लिए फूल लेकर आने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। पर्वत की तलहटी में जल्द ही सुगंधित फूलों की बगिया विकसित करने की योजना है। उत्तरी वन प्रमंडल की ओर से बौनी प्रजातियों के फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्लान तैयार किया गया है।

इसके तहत कौलेश्वरी पर्वत के आसपास स्थित हटवरिया एवं दो अन्य गांवों में ग्रामीणों को फूलों की खेती से जोड़ने की तैयारी है। इससे श्रद्धालुओं को स्थानीय स्तर पर पूजा के लिए फूल उपलब्ध होंगे, वहीं ग्रामीणों के लिए आय का नया स्रोत भी विकसित होगा।

उत्तरी वन प्रमंडल की योजना के अनुसार कौलेश्वरी पर्वत की तलहटियों में अवस्थित गांवों में ट्रांसमिशन लाइन गुजरने वाली उपयुक्त भूमि का चयन कर फूलों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। बौनी प्रजाति के ऐसे फूलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनकी सुगंध अच्छी हो और जिन्हें कम क्षेत्र में भी उगाया जा सके।

इससे पर्वतीय क्षेत्र के वातावरण की सुंदरता बढ़ने के साथ पर्यटन को भी नया आकर्षण मिलेगा। फूलों की सुगंध से महकती बगिया कौलेश्वरी आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए अतिरिक्त आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

धार्मिक पर्यटन के साथ प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने में भी यह पहल सहायक होगी। वन विभाग की योजना सफल होने पर आने वाले समय में फूलों की खेती का दायरा अन्य गांवों तक बढ़ाने की संभावना भी है।

हारसिंगार से रातरानी तक महकेगी बगिया

प्रस्तावित फूलों की बगिया में हारसिंगार, गोंडल, चंपा, रातरानी, मोगरा और मोंरा जैसी सुगंधित फूलों की प्रजातियां शामिल की जाएंगी। अलग-अलग मौसम में खिलने वाले फूलों से क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता बढ़ेगी। श्रद्धालु पूजा के लिए स्थानीय स्तर पर फूल खरीद सकेंगे। इससे बाहर से फूल मंगाने की आवश्यकता भी कम होगी।

फूलों की खेती से स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार और अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलेगा। तैयार फूलों की बिक्री कौलेश्वरी आने वाले श्रद्धालुओं के बीच की जा सकेगी। इसके अलावा फूलों से माला और अन्य पूजा सामग्री तैयार कर ग्रामीण अपनी आय बढ़ा सकेंगे। वन विभाग का प्रयास है कि इस योजना में स्थानीय लोगों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित हो।

सुरक्षा व संरक्षण का रखा जाएगा ध्यान

कौलेश्वरी पर्वत धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में फूलों की खेती के दौरान पर्यावरण, वन्यजीव और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाएगा। खेती के लिए ऐसी प्रजातियों और पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे प्राकृतिक स्वरूप फूलों की सुगंध से महकती बगिया कौलेश्वरी आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए अतिरिक्त आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

धार्मिक पर्यटन के साथ प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने में भी यह पहल सहायक होगी। वन विभाग की योजना सफल होने पर आने वाले समय में फूलों की खेती का दायरा अन्य गांवों तक बढ़ाने की संभावना भी है।

तीन धर्मों का संगम स्थल है कौलेश्वरी

हंटरगंज प्रखंड में स्थित कौलेश्वरी पर्वत ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों को अपने भीतर समेटे हुए है। सनातन, बौद्ध एवं जैन धर्मावलंबियों का संगम स्थल है। तीन धर्मों की अपनी-अपनी मान्यता है। कौलेश्वरी पर्वत की ख्याति देश और दुनिया के विभिन्न कोनों में है।

यहां पर हर साल चार से पांच हजार विदेशी पर्यटक आते हैं। वैसे देखा जाए, तो सालभर में 15-16 लाख श्रद्धालु यहां आते हैं। रामनवमी के मौके पर विशाल मेला लगता है। जिसमें आठ से दस लाख श्रद्धालु शामिल होते हैं।

प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेज दिया गया है। पर्वत की तलहटी में स्थित गांवों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसकी शुरूआत की जाएगी। यदि बेहतर रहा, तो इसका और विस्तार किया जाएगा। बौना फूलों में हारसिंगार, गोंडल, चंपा, रातरानी, मोगरा और मोंरा आदि की प्रजातियां शामिल है। प्रस्ताव का अनुमोदन के साथ कार्य प्रारंभ हो जाएगा।

-राहुल मीना, उत्तरी वन प्रमंडल पदाधिकारी, चतरा। 

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