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लोहरदगा में 120 गांवों के पाहन-पुजारियों ने ली शपथ, सांसद सुखदेव भगत बोले- लोकसभा-विधानसभा से बड़ी है ग्राम सभा

Published: Mon, 02 Nov 2026 09:19 PM (IST)

लोहरदगा में 120 गांवों के पाहन-पुजारियों ने पारंपरिक स्वशासन की रक्षा की शपथ ली। सांसद सुखदेव भगत ने ग्राम सभा ...और पढ़ें

लोहरदगा जिले के 120 गांवों के पाहन, पुजारी, मुंडा, मानकी के साथ हजारों की संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।

लोहरदगा जिले के 120 गांवों के पाहन, पुजारी, मुंडा, मानकी के साथ हजारों की संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।

HighLights

  1. सांसद सुखदेव भगत ने ग्राम सभा को संसद से बड़ा बताया।

  2. पेसा कानून, सरना कोड, महिला अधिकारों पर जोर दिया गया।

जागरण संवाददाता, लोहरदगा। लोहरदगा जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय मैदान में सोमवार को पारंपरिक स्वशासन पड़हा व्यवस्था के तत्वावधान में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। 
 
इस ऐतिहासिक समारोह में जिले के 120 गांवों के पाहन, पुजारी, मुंडा और मानकी के साथ आदिवासी समाज के हजारों ग्रामीण शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत पूरी तरह से पारंपरिक रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों के साथ की गई।
 
समारोह के मुख्य अतिथि लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत थे। सांसद, आगत अतिथियों तथा 120 गांवों के पाहन-पुजारियों और मुंडा-मानकियों ने सामूहिक रूप से पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था और संस्कृति की रक्षा करने का संकल्प लिया।
 

लोकसभा और विधानसभा से भी बड़ी है ग्राम सभा 

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा से भी अधिक महत्वपूर्ण संस्था 'ग्राम सभा' है। 
 
पेसा कानून (PESA Act) ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ग्राम सभा को अभूतपूर्व स्वशासन की ताकत प्रदान की है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों, संस्कृति और स्वशासन पर गर्व होना चाहिए। 
 
कई बार अधिकारों की जानकारी के अभाव में समाज पिछड़ जाता है, इसलिए हर ग्रामीण को अपने संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों के प्रति जागरूक होना बेहद जरूरी है।
 
सांसद ने याद दिलाया कि 24 दिसंबर 1996 को पेसा कानून के माध्यम से ग्राम सभा को विशेष अधिकार दिए गए थे। इस व्यवस्था को आकार देने में भूरिया कमेटी के अध्यक्ष दिलीप सिंह भूरिया, पूर्व विधायक बंदी उरांव, बीडी शर्मा और अन्य विद्वानों का अहम योगदान रहा है। 
 
हालांकि, इस कानून को धरातल पर पूरी तरह प्रभावी होने में लगभग तीन दशक का समय लग गया। उन्होंने नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों को बधाई देते हुए आश्वासन दिया कि वे परंपरा और संविधान की रक्षा के इस सफर में हर कदम पर उनके साथ हैं।
 

सरना धर्म कोड और राष्ट्रीय अवकाश की पुरजोर मांग 

सांसद सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि उन्होंने संसद में सरना धर्म कोड लागू करने का मुद्दा मजबूती से उठाया है। 
 
इसके अलावा, उन्होंने आदिवासी समाज के प्रमुख पर्व-त्योहारों पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के पर्वों पर राष्ट्रीय अवकाश न होना उनकी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा एक अहम विषय है, जिस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। 
 
इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 2013 में राहुल गांधी के प्रयासों से पारित भूमि अधिग्रहण कानून का जिक्र करते हुए कहा कि इससे आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा को एक मजबूत कवच मिला है।
 

महिलाओं के अधिकारों और कानूनों की जानकारी पर जोर 

सांसद ने आदिवासी समाज के भीतर सकारात्मक सुधार की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कस्टमरी कानूनों में महिलाओं के अधिकारों को लेकर पर्याप्त प्रावधानों पर समाज और प्रशासन को मिलकर विचार करना चाहिए।
 
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे सीएनटी (CNT), एसपीटी (SPT), पेसा (PESA) और वन अधिकार कानून (Forest Rights Act) की पूरी जानकारी हासिल करें, ताकि जल, जंगल और जमीन पर अपने कानूनी अधिकारों को सुरक्षित रखा जा सके।
 

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