लातेहार में बारिश का कहर: कुड़ील और बूढ़ा नदी उफान पर, कई गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क टूटा
लातेहार में लगातार बारिश से कुड़ील और बूढ़ा नदी उफान पर हैं, जिससे गारू प्रखंड के कई गांवों का संपर्क मुख्यालय से टूट गया है।

लातेहार में बारिश का कहर
HighLights
कुड़ील और बूढ़ा नदी उफान पर, आवागमन बाधित।
कई गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क टूटा।
भारी बारिश से ग्रामीण जीवन अस्त-व्यस्त, सतर्कता जरूरी।
जागरण टीम, लातेहार। लगातार हो रही वर्षा ने जिले के सुदूर ग्रामीण इलाकों की जिंदगी की रफ्तार थाम दी है। गारू प्रखंड में स्थिति और चुनौतीपूर्ण है। जंगल-पहाड़ों के बीच बसे गांवों तक पहुंचने वाली राहों पर जगह-जगह पानी बह रहा है। कुड़ील नदी का जलस्तर बढ़ने से सुरकुमी-हेसवा मार्ग पर आवागमन प्रभावित है।
सुरकुमी, हेसवा, नावाटोली, भंवरबंधा, बेसनखाड़ और मौनाडोंडा गांवों के लोगों के लिए वर्षा के दिन सिर्फ मौसम बदलने का संकेत नहीं, रोजमर्रा की आवाजाही को लेकर चिंता भी लेकर आते हैं। गारू के सुरकुमी क्षेत्र में कुड़ील नदी सामान्य दिनों में रास्ते का एक हिस्सा भर है, लेकिन वर्षा के दिनों में यही नदी रास्ते की सबसे बड़ी बाधा बन जाती है।
पानी बढ़ने के साथ नदी की धार तेज हो जाती है। ग्रामीणों को प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने के लिए इसी मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है। करीब पांच किलोमीटर की दूरी वाला यह रास्ता तेज जलप्रवाह के समय लंबा और मुश्किल दोनों हो जाता है। हाल की स्थानीय रिपोर्ट में भी कुड़ील नदी में बाढ़ और तेज जलप्रवाह के दौरान इन गांवों का संपर्क प्रभावित होने की स्थिति सामने आई है।
बारेसांढ़ में तूतकु नाला और बूढ़ा नदी भी चुनौती
गारू के बारेसांढ़ क्षेत्र में भी वर्षा के दिनों में जलस्रोतों का बढ़ता जलस्तर ग्रामीणों की चिंता बढ़ाता है। बूढ़ा पहाड़ जाने वाले मार्ग पर तूतकु नाला और बूढ़ा नदी उफान पर है। लगातार वर्षा के कारण छोटी नदियों और नालों के साथ छलकों के ऊपर से पानी बहने लगा है।
कहीं पानी सड़क को काटकर बह रहा है तो कहीं ग्रामीणों को पानी कम होने की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। सबसे बड़ी परेशानी उन परिवारों की है, जिन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए घर से निकलना ही पड़ता है।
किसान खेत तक पहुंचने के लिए परेशान
किसान खेत तक पहुंचने के लिए परेशान हैं तो ग्रामीण बाजार और प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने के लिए मौसम साफ होने की राह देख रहे हैं। बच्चों की आवाजाही को लेकर भी परिवार सतर्क हैं। पानी का बहाव देखकर रास्ता पार करना आसान लग सकता है, लेकिन नीचे की गहराई और धार की ताकत का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।
यही जल्दबाजी कई बार खतरे को न्योता दे सकती है। महुआडांड़, नेतरहाट व बरवाडीह के निचले इलाकों में वर्षा का पानी घरों और आंगन तक पहुंचने से परेशानी और बढ़ गई है। कहीं लोग घर के भीतर जमा पानी निकालने में जुटे हैं तो कहीं सामान को सुरक्षित रखने की चिंता है। लगातार वर्षा ने ग्रामीणों की दिनचर्या को इस तरह उलझा दिया है कि घर से निकलना भी सोच-समझकर पड़ रहा है।
एक दिन में हुई 12 मिलीमीटर वर्षा
मंगलवार को जिले में करीब 12 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। मौसम विज्ञान केंद्र ने आगामी दिनों में भी वर्षा की संभावना जताई है। 24 सितंबर को लातेहार समेत राज्य के कई जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी है। ऐसे में जलस्रोतों का जलस्तर और बढ़ने की आशंका से ग्रामीण इलाकों में सतर्कता जरूरी हो गई है।
वर्षा के साथ तेज हवा और वज्रपात की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी, नाला, तालाब और तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रहने की अपील की है। ग्रामीणों से पानी के तेज बहाव के बीच नदी या छलका पार नहीं करने तथा आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन को सूचना देने को कहा गया है।
