पलामू किला जाने वाले रास्ते पर जंगली हाथियों का पहरा, वन विभाग ने जारी की सुरक्षा एडवाइजरी
पलामू किला और बेतला राष्ट्रीय उद्यान के आसपास जंगली हाथियों की बढ़ती सक्रियता ने ग्रामीणों और पर्यटकों की चिंता बढ़ा ...और पढ़ें

पलामू किला जाने वाले रास्ते पर जंगली हाथियों का पहरा
HighLights
पलामू किला मार्ग पर हाथियों की सक्रियता बढ़ी।
वन विभाग ने सुरक्षा एडवाइजरी जारी कर सतर्क किया।
पर्यटकों और ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह।
संवाद सूत्र, बरवाडीह (लातेहार)। पलामू किला की राह पर अब इतिहास की विरासत के साथ वन्यजीवों की मौजूदगी भी सावधानी की मांग कर रही है। पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के बेतला राष्ट्रीय उद्यान और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली हाथियों समेत अन्य वन्यप्राणियों की बढ़ती सक्रियता ने ग्रामीणों और पर्यटकों की चिंता बढ़ा दी है।
खासकर पलामू किला जाने वाले मार्ग के आसपास हाथियों की आवाजाही को देखते हुए वन विभाग ने सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाने और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।
यात्रा के दौरान सुरक्षा महत्वपूर्ण
पलामू किला अपनी ऐतिहासिक पहचान के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। ऐसे में इस मार्ग पर हाथियों की बढ़ती सक्रियता ने यात्रा के दौरान सुरक्षा को महत्वपूर्ण बना दिया है।
जंगल के स्वाभाविक परिवेश में विचरण करने वाले हाथियों का सामना सड़क पर हो जाए तो जरा-सी असावधानी भी भारी पड़ सकती है। हाथी का रास्ता रोकना, उसके करीब जाना या उसे परेशान करना जानलेवा साबित हो सकता है।
सड़क किनारे गजराज की मौजूदगी, राहगीरों को सतर्क रहने की जरूरत
वन विभाग के अनुसार पलामू किला मार्ग के आसपास जंगली हाथियों के विचरण के अनुकूल प्राकृतिक आवास होने के कारण उनकी आवाजाही बढ़ी है। हाथियों को सड़क के किनारे विचरण करते और मार्ग से गुजरने वाले लोगों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न करते देखा गया है।
विभाग की ओर से की गई फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग में भी उनकी सक्रियता सामने आई है। इस स्थिति को देखते हुए विभाग ने लोगों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। बिना अनुमति दोपहिया और तिपहिया वाहनों को पलामू किला मार्ग पर ले जाने से बचने की हिदायत दी गई है। ग्रामीणों को भी अकेले जंगल की ओर जाने से परहेज करने की सलाह दी गई है।
वन्यजीवों के प्राकृतिक क्षेत्र में मानवीय आवाजाही के दौरान सावधानी बेहद जरूरी है। हाथियों के सामने पड़ने पर उनके व्यवहार का अनुमान लगाना कठिन हो सकता है। ऐसे में रोमांच या उत्सुकता के कारण उनके करीब जाना खतरे को आमंत्रण देने जैसा है।
न छेड़ें, न घेरें सुरक्षित दूरी ही बचाव का रास्ता
प्रभारी रेंजर उमेश कुमार दुबे ने कहा कि जंगली हाथियों की सक्रियता को देखते हुए ग्रामीणों और पर्यटकों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। हाथियों के नजदीक जाने, उन्हें छेड़ने, शोर मचाकर परेशान करने या उनके आवागमन के रास्ते में बाधा डालने से बचना चाहिए। जिस स्थान पर हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिले, वहां अनावश्यक रूप से जाने से परहेज करना चाहिए।
उन्होंने लोगों से वन विभाग के निर्देशों का पालन करने की अपील की। विभाग हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है, ताकि किसी अप्रिय घटना की आशंका को कम किया जा सके। जंगल का अपना संसार है और हाथियों के अपने रास्ते। इन रास्तों पर मानवीय दखल जितना कम होगा, इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव की आशंका उतनी ही कम होगी।
पलामू किला की ऐतिहासिक विरासत को देखने निकलने वाले पर्यटकों और आसपास रहने वाले ग्रामीणों के लिए जरूरी है कि वे सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
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