झारखंड में माओवाद का आखिरी किला ढहा: 20 लाख का इनामी रविंद्र गंझू गिरफ्तार, 70 से ज्यादा मामलों में था वांटेड
झारखंड में 20 लाख का इनामी हार्डकोर माओवादी रविंद्र गंझू लातेहार के चंदवा से गिरफ्तार कर लिया गया है। वह ...और पढ़ें

रविंद्र गंझू। फोटो जागरण
HighLights
20 लाख का इनामी हार्डकोर माओवादी रविंद्र गंझू गिरफ्तार।
दो दशकों से झारखंड के जंगलों में फैलाया था आतंक।
70 से अधिक गंभीर मामलों में वांछित था नक्सली।
जागरण टीम, लातेहार। दो दशक तक झारखंड के जंगलों में जिसका नाम सुनते ही गांवों में दहशत फैल जाती थी, वह आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया। हार्डकोर माओवादी 20 लाख रुपये का इनामी रविंद्र गंझू उर्फ मुकेश गंझू उर्फ सुरेंद्र गंझू को लातेहार के चंदवा क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया।
लातेहार, लोहरदगा, गुमला, पलामू, चतरा और रांची के जंगलों में वर्षों तक आतंक का पर्याय बने इस नक्सली कमांडर की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियां नक्सलवाद के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में मान रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल एक बड़े इनामी नक्सली की गिरफ्तारी नहीं है, यह माओवादी संगठन के बचे-खुचे नेटवर्क पर सीधा प्रहार भी है। अब उससे पूछताछ के आधार पर हथियार आपूर्ति तंत्र, टेरर फंडिंग, सक्रिय दस्तों, वित्तीय नेटवर्क और शहरी संपर्कों तक पहुंचने की तैयारी की जा रही है।
70 से अधिक मामलों में आरोपी
चंदवा थाना क्षेत्र के हेसला मौजा स्थित बांडीटोला निवासी रविंद्र गंझू झारखंड पुलिस के साथ-साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (ANI) की वांछित सूची में भी शामिल था। उसके खिलाफ लातेहार, लोहरदगा, गुमला, चतरा समेत विभिन्न जिलों में 70 से अधिक मामले दर्ज हैं।
अकेले लातेहार जिले में ही लगभग 45 संगीन मामलों में उसका नाम दर्ज बताया जाता है। हत्या, विस्फोट, रंगदारी, सुरक्षाबलों पर हमला, हथियार लूट, लेवी वसूली और नक्सली गतिविधियों के संचालन जैसे गंभीर आरोप वर्षों से उसके खिलाफ दर्ज हैं।
रविंद्र गंझू कई चर्चित नक्सली घटनाओं का मुख्य आरोपित रहा है। 22 नवंबर 2019 को चंदवा थाना क्षेत्र के लुकुइया मोड़ के पास पीसीआर वैन पर हुए नक्सली हमले में चार पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।
जांच एजेंसियां उसे इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता मानती हैं। फरवरी 2022 में लातेहार-लोहरदगा सीमा के बुलबुल जंगल में चले ऑपरेशन डबल बुल के दौरान बरामद भारी मात्रा में हथियार और नक्सली सामग्री से जुड़े मामले में भी वह वांछित था।
वर्ष 2025 में चंदवा थाना कांड संख्या 234/2025 के तहत जेसीबी और ट्रैक्टर में आगजनी की घटना में भी उसका नाम सामने आया था। इसके अलावा लेवी वसूली, रंगदारी और सुरक्षाबलों पर कई हमलों में उसकी संलिप्तता जांच एजेंसियों के अभिलेखों में दर्ज है।
गिरफ्तारी के दौरान भागने का प्रयास
पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी के दौरान रविंद्र गंझू भागने का प्रयास करने लगा, लेकिन घेराबंदी कर उसे दबोच लिया गया। पूछताछ में संगठन के शेष सक्रिय सदस्यों, हथियारों की आपूर्ति, वित्तीय नेटवर्क और शहरी संपर्कों से जुड़े कई अहम खुलासे होने की संभावना है।
वर्षों तक सुरक्षा बलों को चुनौती देने वाला यह माओवादी कमांडर अब सलाखों के पीछे है और उसकी गिरफ्तारी को झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
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