संवाद सूत्र, चंदवा (लातेहार): सड़को को विकास का पैमाना कहा जाता है। यह गांव के विकास की कहानी बयां करता है लेकिन यदि गांव तक पहुंचने वाली सड़कें बदहाल हो तो इसे क्या कहा जाए। गांव विकास के सपने को लेकर पंचायती राज चुनाव कराया गया बावजूद लोगों के सपनों को पर नहीं मिल सकें। चंदवा-चांपी-लोहरदगा पथ से कटकर (एनएच 39 के समीप) लुकूइया गांव से बोदा गांव जानेवाला पथ इसकी कहानी बयां करता है। बरसात के साथ इन गांवों में आवागमन मुश्किल हो जाता है। सायकिल व मोटरसायकिल सवार के साथ-साथ पैदल चलनेवाले राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्कूली बच्चों की परेशानी तो कहने के लायक भी नहीं होती। वैश्विक महामारी के कारण इन दिनों स्कूल हलांकि बंद है। बावजूद पुस्तक लेने अथवा अन्य कार्याें के लिए इन्हें भी गांव से बाहर निकलना ही पड़ता है। जानकारी के अनुसार विगत लगभग एक-डेढ़ दशक पूर्व इस पथ के कायाकल्प के प्रयास के तहत कुछ दूरी तक पथ का कालीकरण भी किया गया था। तब पथ की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे मगर उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र को लेकर लोगों ने चुप रहने में ही अपनी भलाई समझी थी। इन दिनों हो रही बारिश के बीच ग्रामीण सड़क पर लुकुइया बोदा पथ पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए है। इन गड्डो में बारिश का पानी भर गया है। इसके कारण ग्रामीणों को आवागमन में परेशानियों से दो-चार होना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार इन गड्ढों में गिर कई लोग दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। झामुमो युवा अध्यक्ष बबलु राही, शिवनाथ यादव, उमश यादव, सहाबुछ्दी अंसारी, महबूब अंसारी, सेराज अंसारी, सुधीर गंझू, प्रमोद गंझू, प्रदीप यादव, ग्रामीणों की मानें तो उक्त ग्रामीण पथ को दुरूस्त कराने को लेकर कई बार प्रशासन से गुहार लगाई जा चुकी है मगर फलाफल शून्य रहा है। ग्रामीणों की परेशानियों को देखते हुए खस्ताहल पथ को दुरूस्त करने की मांग जोर पकड़ने लगी है।

Posted By: Jagran

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