संवाद सूत्र, बेतला (लातेहार) : बेतला नेशनल पार्क इलाके में पालतू हाथी काल भैरव को मारने वाले हाथी बाहरी थे। वन विभाग के पदाधिकारियों ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि पलामू व्याघ्र परियोजना क्षेत्र के हाथियों ने आज तक ऐसी घटना को अंजाम नहीं दिया था। वनकर्मियों ने बताया कि इस घटना के बाद अन्य पालतू हाथियों की सुरक्षा के लिए पुख्ता व्यवस्था बनाई जा रही है। बुधवार को पूरे दिन परिसर में अधिकारियों का जमावड़ा लगा रहा। हर कोई अपने स्तर से इस घटना में शामिल हाथियों की पड़ताल करने की कोशिश में जुटा रहा। काल भैरव के मारे जाने की घटना के बाद हमलावर हाथियों पर नजर रखने के लिए ट्रैकरों की विशेष टीम इलाके में पूरी तरह सक्रिय हो गई है। पुराने स्थान पर हाथियों को रखने की कवायद :

काल भैरव को सीता और मुर्गेश के साथ वर्ष 2018 में मैसूर से लाया गया था और तीनों को शुरुआत में कमलदह झील के पास रखा गया। बाद में तीनों को पलामू किले के पास लाया गया। पिछले साल पालतू हथिनी जूही और राखी को भी पलामू किले में शिफ्ट कर दिया गया था। लेकिन काल भैरव हाथी के साथ हुई इस घटना के बाद से बेतला पार्क परिसर के प्रवेश द्वार के समक्ष बने शेड में पालतू हाथियों को रखने की योजना विभाग की ओर से बनाई जा रही है।

अब भी तीन पालतू हाथियों की सुरक्षा की चिता :

काल भैरव पालतू हाथी के साथ हुई इस घटना के बाद बेतला नेशनल पार्क के चार पालतू मादा हाथी जूही, राखी, मुर्गेश व सीता की सुरक्षा को लेकर विभाग सचेत हो गया है। हाथियों को रखे जाने वाले शेड के समीप वन विभाग के ट्रैकर गार्ड को सचेत किया गया है। साथ ही आसपास के स्थानीय ग्रामीणों को भी हाथियों की सुरक्षा के लिए जागरूक किया गया है।

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