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लातेहार में दम तोड़ गई नल-जल योजना, बूंद-बूंद को मोहताज गांव के लोग

Published: Fri, 17 Apr 2026 01:38 PM (IST)

लातेहार के बारियातू प्रखंड स्थित गाड़ी गांव में जल नल योजना विफल हो गई है। लगभग तीन हजार की आबादी ...और पढ़ें

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संवाद सूत्र, बारियातू (लातेहार)। प्रखंड के गाड़ी गांव में जल नल योजना की हकीकत कुछ ऐसी है, जहां टंकियां तो आसमान छूती नजर आती हैं, लेकिन उनमें पानी का नामोनिशान नहीं है। पाइपलाइन बिछी है, नल लगे हैं, पर उनमें से बूंद तक नहीं गिरती। करीब तीन हजार की आबादी वाला यह गांव आज भी पुराने जमाने की तरह कुआं और नदी के सहारे जीवन गुजारने को मजबूर है।

हर दिन पानी के लिए जंग

गांव के लोगों के लिए हर दिन पानी जुटाना किसी जंग से कम नहीं है। सुबह होते ही महिलाएं और बच्चे बाल्टी और बर्तन लेकर निकल पड़ते हैं। कई बार दूर-दराज के कुओं और नदी तक जाना पड़ता है। गर्मी बढ़ने के साथ हालात और बिगड़ जाते हैं। नदी सिकुड़ने लगती है और कुएं भी जवाब देने लगते हैं। ऐसे में एक-एक बूंद पानी की कीमत समझ में आती है।

जल मीनारें बनीं बेकार ढांचा

गांव में जल नल योजना के तहत लगाए गए सभी जल मीनार खराब पड़े हैं। कहीं मोटर जल चुकी है, कहीं पाइपलाइन टूट गई है, तो कहीं देखरेख के अभाव में पूरी व्यवस्था जाम हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना तो आई, लेकिन उसका रखरखाव और जिम्मेदारी कहीं रास्ते में ही छूट गई। अब ये टंकियां सिर्फ यह याद दिलाती हैं कि कभी यहां पानी आने का वादा किया गया था।

आश्वासन की वर्षा, लेकिन पानी नहीं

रामकुमार प्रसाद, सुरेंद्र प्रसाद, शिवशंकर राम, दीपन राम, उदेश्वर गंझू, गुलटन पाहन समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार विभाग को इसकी सूचना दे चुके हैं। हर बार अधिकारी आते हैं, देखते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं। गांव में यह चर्चा आम है कि यहां पाइपलाइन से ज्यादा वादे बहते हैं, लेकिन पानी नहीं।

ग्रामीणों ने कहा पानी नहीं तो सब है अधूरा

ग्रामीणों का कहना है कि पानी के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती। जब पीने का पानी ही मुश्किल से मिले, तो बाकी सुविधाएं बेकार लगती हैं। गांव में असुरक्षित पानी के उपयोग से बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

लगातार अनदेखी से ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही जल मीनारों की मरम्मत कर पानी की आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। गाड़ी गांव की यह परेशानी व्यवस्था की उदासीनता की है, जहां टंकियां खामोश हैं और लोग जवाब की तलाश में हैं।

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ग्रामीणों की ओर से मिली जानकारी पर वरीय अधिकारियों से संवाद किया गया है। बहुत जल्द मामले का समाधान हो जाएगा।

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अमित कुमार पासवान, प्रखंड विकास पदाधिकारी, बारियातू।

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