झुमरी तिलैया (कोडरमा), जेएनएन। कोडरमा जिले के लोगों में खेल का उत्साह धीरे-धीरे घटता जा रहा है। खेल व खिलाडिय़ों को बढ़ावा देने के प्रति न तो कभी स्थानीय जनप्रतिनिधियों का ध्यान रहा और ना ही सरकार का। यहां के जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता में खेल कहीं है ही नहीं। ऐसे में यहां के खिलाडिय़ों के लिए मौजूदा व्यवस्था कारगर नहीं है।

इसके कारण प्रतिभावान खिलाडिय़ों को दूसरे जिला या फिर प्रदेश से बाहर जाकर कोचिंग लेनी पड़ती है। कोडरमा जिले में 80 के दशक में खेल का स्तर काफी अच्छा था। उस समय फुटबॉल, क्रिकेट, वेटलिफ्टिंग आदि खेलों में यहां के खिलाड़ी राज्य से लेकर दूसरे प्रदेशों तक अपनी छाप छोड़ते थे। उस समय खिलाडिय़ों को मैदान और सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती थी।

परंतु धीरे-धीरे कोडरमा में खेल का ग्राफ गिरता चला गया और आज हालात चिंताजनक है। वक्त चुनाव का है तो यह मुद्दा भी गरम है। खिलाडिय़ों को अब नए प्रतिनिधि व सरकार से उम्मीद है। वर्तमान में ना तो जिले में ढंग के खेल मैदान हैं और ना ही खिलाडिय़ों के लिए कोई सुविधा-संसाधन। 

वहीं जिले के खिलाड़ी प्रतिभा के धनी हैं। यहां के कई खिलाड़ी हैं जो राज्य स्तर पर अपनी छाप छोड़ चुके हैं। पर, इन्हें कोई सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है। अभी शहर में एकमात्र मैदान सीएच हाई स्कूल में है। यहां स्थानीय खिलाड़ी थोड़ा-बहुत खेल कर अपना शौक पूरा करते हैं। जिले में आउटडोर व इंडोर स्टेडियम की मांग लंबे समय से हो रही है, लेकिन यह सपना पूरा नहीं हो पाया है।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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