अनूप कुमार, कोडरमा: किसी जमाने में खेती व ¨सचाई की सुविधा से पूरी तरह महरूम पथरीली व बंजर जमीन के गर्भ से बेशुमार पत्थर निकलना क्या शुरू हुआ, लोगों की नीयत व ईमान बदलने लगा। पत्थर खदान से निकली यही बदले की आग ने एक ओर जहां कांग्रेस जिलाध्यक्ष शंकर यादव व उनके निजी अंगरक्षक कृष्णा यादव की जीवन लीला समाप्त कर दी, वहीं इनके चालक धर्मेंद्र यादव ¨जदगी व मौत से जूझ रहे हैं।

दूसरी ओर मामले में शंकर के जानी दुश्मन बने मुनेश यादव, उसके भाई पवन यादव, भांजा सुदीप यादव और फुफेरा भाई नरेश यादव डबल मर्डर व अवैध विस्फोटक के इस्तेमाल के मामले में कानून की गिरफ्त में आकर परिवार सहित बर्बादी के कगार पर पहुंच गया है। प्रतिमाह लाखों की कमाई देनेवाली यही पत्थर खदान इनके बीच विवाद का मूल कारण था।

डीआइजी भीमसेन टूटी के अनुसार कि शंकर यादव की खदान जिस भूखंड पर स्थित है, वह कभी मुनेश यादव की पूर्वजों की हुआ करता था। मुनेश के अनुसार शंकर ने अनैतिक तरीके से इसे हासिल किया है। इसी बात को लेकर लंबे समय से दोनों के बीच विवाद चला आ रहा था। मुनेश इसी बदले की आग में झूलस रहा था। जिसकी परिणिति 13 फरवरी को शंकर को विस्फोट कर उड़ाने की घटना के रूप में सामने आयी।

:::::: पत्थर तोड़नेवाले विस्फोटक से शंकर को उड़ाया ::::::

पुलिस के अनुसार शंकर को खदान में पत्थर तोड़ने के लिए इस्तेमाल होनेवाले विस्फोटक डेटोनेटर व पावर जेल से उड़ाया गया। इसे और अधिक विध्वंसक मनाने के लिए एक मेटल ट्रिपलेटर बरही के एक लेथ दुकान में तैयार किया गया था। यहीं 6 एमएम के छड़ से सैकड़ों नुकीला कील तैयार की गई थी। मेटल पाइप के ट्रिपलेटर में विस्फोटक के साथ, मेटल कील, अमोनियम नाइट्रेट आदि डालकर एक ऑटो में कुट्टी, भूसा आदि के नीचे छिपाकर इसका डायरेक्शन उसी दिशा में रखा गया, जिधर से शंकर यादव की गाड़ी गुजरनेवाली थी। शंकर की गाड़ी को ऑटो के पास धीमा करने के लिए यहीं स्टोन डस्ट से एक दिन पहले ही एक अस्थायी स्पीड ब्रेकर तैयार किया गया था।

पवन यादव ने विस्फोट के

इस साजिश में शामिल नरेश यादव शंकर यादव की रेकी करते हुए उसका लोकेशन मोबाइल पर पवन यादव व सुदीप यादव को दे रहा था। पवन यादव विस्फोट के दौरान अपने बचाव के लिए घटनास्थल से थोड़ी दूर पर सड़क के किनारे एक मिट्टी का टीला के नीचे छिपकर विस्फोट किया। उसने अपने बचाव के लिए लोहे का एक ढालनुमा प्लेट हैंडल सहित तैयार किया था, जो घटनास्थल से थोड़ी दूर पर बंकर के समीप पाया गया था। वहीं घटना के बाद मुनेश यादव का भांजा (संभवत: नाबालिग) वहां जुटी भीड़ में शामिल होकर मामले की जानकारी लेने लगा।

:::::: दो दिन पूर्व ही मुनेश निकल गया था वेल्लोर ::::::::::::::::::

पुलिस के अनुसार बरही के एक लेथ में मेटल ट्रिपलेटर छर्रा आदि तैयार करवाने के बाद मुनेश यादव 11 फरवरी को तमिलनाडु के वेल्लोर के लिए निकल गया था। वहीं 13 फरवरी को मुनेश के भाई पवन यादव एवं अन्य ने मिलकर घटना को अंजाम दिया। घटना के बाद पवन यादव कोलकाता भाग गया था। उसे मुनेश की गिरफ्तारी के बाद कोडरमा एसपी शिवानी तिवारी ने टेक्नीकल सेल के सहयोग से कोलकाता पुलिस के सहयोग से कोलकाता में गिरफ्तार कराया।

: पुलिस को भटकाने के लिए वेल्लोर गया था मुनेश ::::::::::::

माना जा रहा है मुनेश को यह पता था कि घटना के बाद पुलिस का सीधा संदेह उसपर जाएगा। शायद इसीलिए उसने अपने इलाज के बहाने घटना के दो दिन पूर्व ही वेल्लोर निकल गया था। पुलिस ने उसे सीएमसी (क्रिश्चयन मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल) वेल्लोर के परिसर से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार टेक्निकल सेल की मदद से उसे वेल्लोर में गिरफ्तार किया गया। वहां से उसे न्यायालय में प्रस्तुत कर ट्रांजिट रिमांड प्राप्त करने के बाद कोडरमा लाया गया। इसके बाद उसे सोमवार को कोडरमा के न्यायालय में प्रस्तुत कर पांच दिनों के लिए रिमांड पर लिया गया।

:::::::::: एमए पास है पवन यादव:::::::::

कांग्रेस जिलाध्यक्ष शंकर यादव को विस्फोट कर उड़ानेवाला पवन यादव एमए पास है। पुलिस के अनुसार ये लोग भी पत्थर के खदान से जुड़े हैं। इसलिए विस्फोट कराने में एक्सपर्ट है। उसने ही पूरे कारगर तरीके से विस्फोट की घटना को अंजाम दिया। वहीं मुनेश का भांजा नाबालिग बताया जा रहा है। विस्फोट के तुरंत बाद पवन यादव नरेश यादव के साथ मोटरसाइकिल में बैठकर वहां से भाग गया, जबकि भांजा वहां एकत्रित भीड़ में शामिल हो गया।

Posted By: Jagran

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