बाटम

लॉकडाउन में जिले के 125 बसों का परिचालन ठप, बैंक का किश्त, रोड टैक्स, इंश्योरेंस समेत अन्य खर्च है चालू

फोटो::::: 15 में है। संवाद सहयोगी, झुमरीतिलैया (कोडरमा): गत डेढ़ माह से परिवहन व्यवस्था पर लॉकडाउन लगा हुआ है। कोरोना महामारी के कारण अंतरराज्जीय बस सेवा के साथ राज्य के अंदर चलने वाले सार्वजनिक परिवहन पर रोक लगी हुई है। इससे जहां यात्री परेशान हैं वहीं बसों का पहिया जाम होने से बढ़ते कर्ज को लेकर बस मालिक त्राहिमाम कर रहे हैँ। खासकर स्टेशन से उतरने वाले यात्रियों को निजी वाहन या ऑटो महंगा पड़ रहा है। ज्ञात हो कि तीन माह से राज्य में लॉकडाउन है। वहीं 16 मई से जिले भर की बसे बस स्टैंड में खड़ी हैं। भले ही बसें सड़कों पर नहीं उतरी, लेकिन बिना चले ही इन बसों का रोड टैक्स, इंश्योरेंस चुकाना पड़ेगा। इस बार सरकार रोड टैक्स को लेकर किसी प्रकार की रियायत देने के मूड में नहीं है।

पिछले वर्ष लॉकडाउन में परमिट वाले वाहनों का 256 दिनों का रोड टैक्स माफ हुआ था। इससे बस संचालकों को थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन इस वर्ष ऐसी कोई योजना फिलहाल नहीं है। इस संबंध में कोडरमा जिला बस ऑनर एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मेंन्द्र कुमया यादव उर्फ बंशी यादव ने बताया कि अधिकांश बसें लोन पर होती है। इससे बस मालिकों का किश्त फेल हो रहा है। जबसे बसें खड़ी है, तब से उसका रख रखाव, ड्राइवर, कंडक्टर, खलासी का मेहनताना देने के बाद बैंकों को पैसा चुकाना, रोड टैक्स और इंश्योरेंस का खर्च अलग है। ऐसे में बस मालिक कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बसों का संचालन करने की छूट दे, ताकि टैक्स के साथ साथ जीविका भी चलाया जा सके। बसों के खड़ा रहने से टायर सूख रहें हैं और बैट्री सहित कई कल पूर्जे भी खराब हो रहे हैं। यह सब खर्च अलग है। :::::::::प्रत्येक तिमाही पर 85 सौ का टैक्स::::::: एक बस के लिए प्रत्येक तिमाही 85 सौ रुपए का रोड टैक्स जमा करना पड़ता है। अगर एक तिमाही फेल हुई तो दूसरी तिमाही में 200 प्रतिशत की फाइन के साथ टैक्स जमा करना पड़ता है। इसके अलावा इंश्योरेंस के लिए अलग से प्रति बस कम से कम 20 से 25 हजार रुपए तिमाही जमा करना पड़ता है। बस संचालकों ने सरकार से टैक्स में छूट देने की मांग की है।

Edited By: Jagran