संवाद सहयोगी, कोडरमा : डीसी रमेश घोलप ने रविवार को कोडरमा बागीटांड़ इंजीनियरिग कालेज भवन स्थित कोविड अस्पताल का निरीक्षण किया। अस्पताल परिसर में मरीजों के स्वजनों से बात कर उनकी समस्याएं, सुझाव और शिकायतों को सुना। वहीं मरीजों के स्वजनों के सुझाव पर अमल करते हुए वरीय पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। कुछ परिजनों ने डीसी को बताया कि 5-6 दिनों से बिना निबंधित (झोला छाप) डाक्टर द्वारा इलाज करा रहे थे। टाइफाइड कहकर उसकी दवाई दी जा रही थी। डीसी ने कहा यह चिता का विषय है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को झोलाछाप चिकित्सकों के विरूद्ध कार्रवाई करने का निर्देश दिया। खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति चिताजनक है। लोग जानकारी के अभाव में लक्षण होने के बाद भी कोविड जांच कराए बैगर झोलाछाप डाक्टर से इलाज करवा रहे हैं। इससे कोविड अस्पताल में आ रहे मरीज काफी देर से भर्ती हो रहे है। कइयों का आक्सीजन लेवल भर्ती के समय 70, 60 से कम देखा जा रहा है। स्थिति गंभीर होने पर मौत भी हो रही है। डीसी ने लोगों से अपील की कि लक्षण होने पर जांच करवाएं और निबंधित चिकित्सकों की सलाह लेकर ही उपचार शुरू करें। सही समय पर कोरोना का इलाज शुरू करने पर बहुत लोगों की जान बचाई जा सकती है। डीसी ने कई परिजनों से कहा कि आक्सीजन लेवल इतना कम होने के बाद अस्पताल लाना चिंताजनक है। लक्षण आने के तुरंत बाद लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। यहां तक कि कोविड के किसी तरह के लक्षण आने के बाद तुरंत निबंधित चिकित्सकों से इलाज शुरू करने और आक्सीजन लेवल कम होने पर बिना देर किये अस्पताल में भर्ती कराने को कहा। उन्होंने मरीज के परिजनों के लिए भी नियमित अंतराल पर कोविड का टेस्ट करवाने और संक्रमित पाए जाने पर तुरंत मेडिकल किट एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया।