कोडरमा : सरकारी विभागों में अधिकारियों की मनमानी से खाता खुलता और बंद भी होता है। विभागों के कई-कई बैंकों में खाता होना भी गड़बड़ी को बढ़ावा मिलता है। कल्याण विभाग में 1.40 करोड़ की गड़बड़ी के मामले सामने आने के बाद वरीय पदाधिकारी इसे लेकर गंभीर हो गए हैं। विभाग का एक दर्जन बैंकों में खाता संचालित था, वह भी नियम विरूद्ध। इन खातों में मद भी निर्धारित नहीं था। यानी अधिकारी के इच्छा पर संबंधित बैंक में किसी भी मद की राशि जमा हो रही थी। गड़बड़ी का कारण भी कुछ यही है। जबकि वित्त विभाग व सरकार के निर्देश के तहत विभागों को दर्जन भर खाता के बजाय एक या दो खाता संचालित करने के लिए दिशा-निर्देश भी जारी था। बावजूद वर्षों से कल्याण विभाग का एक दर्जन बैंकों में खाता होना विभाग पर सवाल उठा रहा है। इधर, गड़बड़ी सामने आने के बाद एसबीआई व बैंक ऑफ इंडिया में दो खातों को छोड़ सभी बैंकों के खाता क्लोज कर दिया गया। वहीं विभाग की ओर से वरीय पदाधिकारियों को पत्रचार कर टीम बनाकर जांच कराने का अनुरोध किया गया है। माना जा रहा है कि चुनाव बाद इस मामले पर गहनता से जांच की जाएगी। जांच के जद में बैंकों के अधिकारियों के साथ-साथ विभाग के अधिकारी भी आएंगे। प्रभारी कल्याण पदाधिकारी नरेश रजक के अनुसार वरीय पदाधिकारियों को प्रतिवेदित कर अग्रेतर कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। ::::::::::ऐसे हुआ मामले का खुलासा:::::::::

कोडरमा: कल्याण विभाग में प्रधान सहायक के पद पर कार्यरत मो. मोबिन गत 30 नवंबर को रिटायर्ड हो गये। इसके उपरांत प्रधान सहायक द्वारा विभिन्न बैंकों में स्टेटमेंट मिलान कार्यालय रोकड़ पंजी से की जाने लगा। कोडरमा बाजार स्थित ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स शाखा में 1.40 करोड़ रूपया शेष होने की जानकारी कार्यालय को थी। लेकिन जब वे बैंक पहुंचे तो राशि नहीं थी। बैंक में पता चला की वर्ष 14-15 में ही उक्त राशि को लाभुक छात्रों के खाते में भेज दी गई। यह सुनते ही कार्यालय सहायक के होश उड़ गये। तुरंत इसकी जानकारी प्रभारी पदाधिकारी को दी। :::::::::380 में एक भी छात्र ने नहीं दिखाया ईमानदारी:::::::::::

कोडरमा: कल्याण विभाग के पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति में 1.40 करोड़ रूपया छात्रों के खाते में दोबारा जाने के बाद भी किसी 380 में किसी छात्र ने ईमानदारी नहीं दिखायी। यह राशि पहले छात्रों के खाते में आईसीआईसीआई बैंक द्वारा भेजी गई थी। विभाग का प्राधिकार पत्र इस बैंक को मिला था। लेकिन ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स द्वारा भी इन 380 छात्र-छात्राओं के खाते में राशि से बिना अनुमति पत्र के भेज दिया गया। यह राशि राज्य के छात्र जो कोडरमा में इंजीनियरिग व अन्य कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे है, उन्हें छात्रवृति के रूप में दी जाती है। वहीं दो बार राशि जाने के बाद भी किसी छात्र ने ना तो बैंक में ना ही कार्यालय में आकर इसकी सूचना दी। अब बैंक संबंधित छात्रों के खाते को फ्रीज कर राशि वसूली की तैयारी कर रही है। ::::::::होते रहा ऑडिट, नहीं पकड़ में आया मामला::::::

कोडरमा: 5 वर्ष पूर्व कल्याण विभाग में 1.40 करोड़ की गड़बड़ी होने के बाद भी ऑडिट दल इसे पकड़ने में विफल रहे थे। जबकि विभागों में हर वर्ष ऑडिट होना सामान्य प्रक्रिया है। ताकि लेन-देन व राशि की सत्यता सामने आ सके। लेकिन विभाग में कई बार ऑडिट के बाद भी मामले का खुलासा नहीं होना गंभीर विषय है। ::::::::बदलते रहे पदाधिकारी::::::

कोडरमा: कल्याण विभाग में तत्कालीन कल्याण पदाधिकारी अजीत निरल सांगा के स्थानांतरण के बाद विभाग को नियमित पदाधिकारी नहीं मिला। समय के साथ-साथ प्रभारी पदाधिकारी ही विभाग का संचालन करते रहे, लेकिन इस मामले का खुलासा नहीं हो सका। इस दौरान कार्यपालक दंडाधिकारी मनीषा वत्स, दो बार डीआरडीए निदेशक अनुज प्रसाद, राजेश साहू आदि को विभाग का प्रभार मिला था।

Posted By: Jagran

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